Greenland विवाद से ट्रंप की रणनीति पर सवाल-(रिटायर्ड) ब्रिगेडियर मदान

Retired-Brigadier-Madan

नई दिल्ली वर्ल्ड डेस्क : ग्रीनलैंड को लेकर वैश्विक सियासत गरमाई हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दुनिया को अपना संदेश पहुंचा दिया है कि अमेरिका ग्रीनलैंड लेकर ही रहेगा, इसके सिवा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। हालांकि, यूरोपीय यूनियन इस मामले में अमेरिका के खिलाफ है। ईयू लगातार अमेरिका के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहा है। ऐसे में (रिटायर्ड) ब्रिगेडियर अद्वित्य मदान ने बताया कि अमेरिकी सरकार की ग्रीनलैंड में कार्रवाई का नाटो पर क्या असर पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि ग्रीनलैंड में रूस और चीन अमेरिका के लिए कितने बड़े खतरे साबित हो सकते हैं।

(रिटायर्ड) ब्रिगेडियर अद्वित्य मदान ने कहा, “कल आठ देशों नार्वे, स्वीडेन, फिनलैंड, डेनमार्क, ब्रिटेन, नीदरलैंड और जर्मनी ने एक एक्सरसाइज का नाम देकर अपने ट्रूप्स भेजे हैं, वो एक्सरसाइज नहीं है, यह अमेरिका को एक संदेश देना चाहते हैं कि ग्रीनलैंड पर जो ऑपरेशन करने वाले हैं, वह आसान नहीं होगा।”

ट्रंप की कार्रवाई से नाटो कमजोर होगा

ट्रंप की कार्रवाई से नाटो पर पड़ने वाले असर को लेकर उन्होंने कहा, “नाटो का संगठन 32 देशों का है, वह एक तरह से बर्बाद हो जाएगा। अमेरिका नाटो का एक लीडर है, लेकिन वह दूसरे नाटो देश पर हमला कर रहा है। इसका बड़ा भारी नुकसान होगा। जो नाटो के 32 देश थे, वे लीडरशिप, कमांड एंड कंट्रोल और डिफेंस व्यापार के लिए अमेरिका पर निर्भर थे। पूरा डिफेंस का हार्डवेयर अमेरिका से आता था। ऐसे में अमेरिका की कार्रवाई के बाद पूरे यूरोपीय यूनियन को सारी चीजें फिर से रिफ्रेम करनी पड़ेंगी।”

उन्होंने आगे कहा कि इन्हें सोचना पड़ेगा कि ये मिलिट्री हार्डवेयर किस देश से लेंगे, आपस में ही एक-दूसरे से लेन-देन करेंगे। इनका कमांड एंड कंट्रोल पूरी तरह से टूट जाएगा। 1951 से अमेरिका और डेनमार्क के बीच सुरक्षा समझौता है कि अगर ग्रीनलैंड को खतरा होता है, तो अमेरिका वहां पर अपने ज्यादा सैनिक भेज सकता है, अपने सैन्य बेस बढ़ा सकता है।

अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड पर रूस-चीन कितना बड़ा खतरा हो सकता है, इसे लेकर रिटायर्ड ब्रिगेडियर ने कहा, “रूस और चीन की तरफ से कोई भी औपचारिक खतरा नहीं है। दोनों देशों ने हमले को लेकर अब तक कोई भी चेतावनी या संकेत नहीं दिया है। वेनेजुएला में जैसे ट्रंप ने किया, उसमें मकसद ये नहीं था कि मादुरो को किडनैप करना है, उनका मुख्य मकसद तेल था।

पूरे वर्ल्ड में 20 फीसदी ऑयल रिजर्व वेनेजुएला के पास है। हालांकि, उनकी रिफाइनमेंट की क्षमता 1 फीसदी ही है, लेकिन उसे बढ़ाई जा सकती है। क्योंकि अमेरिका के पास ऑयल रिफाइनरी है। ग्रीनलैंड में अमेरिका को रूस और चीन से कोई खतरा नहीं है। रेयर अर्थ मिनरल्स पर ट्रंप की नजर है। ट्रंप एक बिजनेसमैन हैं।”

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