जबलपुर, संवाददाता : मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व राज्यसभा सदस्य विवेक कृष्ण तन्खा के बीच लंबे समय से चल रहा कानूनी विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के सौहार्दपूर्ण समाधान खोजने के सुझाव के बाद, दोनों नेताओं ने लंबी कानूनी लड़ाई के बजाय बातचीत का रास्ता चुना।
संसद में मुलाकात और बातचीत के बाद, विवेक तन्खा ने चुनाव के दौरान दिए गए बयानों के संबंध में दायर किए गए सिविल और आपराधिक मानहानि के मामलों को वापस लेने का फैसला किया।
समझौते को अभिलेख पर लेते हुए करते सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेlा व न्यायमूर्ति एनके सिंह की युगलपीठ ने मानहानि के प्रकरण को निरस्त करने का राहतकारी आदेश पारित कर दिया।
दरअसल, तन्खा ने आरोप लगाया था कि शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें पंचायत चुनावों पर रोक के लिए दोषी ठहराया। ऐसा करने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेशों को गलत तरीके से पेश किया।
इसी के व्यथित होकर उन्होंने मानहानि का नोटिस भेज दिया था। बाद में अदालत में मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया, जो जबलपुर की एमपीएमएलए कोर्ट में विचाराधीन रहने के दौरान प्रकरण निरस्त कराने शिवराज सहित अन्य पहले हाई कोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए।
