नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने दावा किया है कि उसके पास पाकिस्तानी सेना के कई सैनिक हिरासत में हैं।
संगठन ने पाकिस्तानी मिलिट्री के उस बयान को खुलकर चुनौती दी है जिसमें इन लोगों को अपना सैनिक बताने से इनकार किया गया था।
‘हक्कल’ ने जारी किया वीडियो
BLA ने अपने आधिकारिक मीडिया विंग हक्कल के जरिए से नया वीडियो जारी किया है। इसमें आठ पाकिस्तानी आर्मी के सैनिक कैमरे के सामने खड़े होकर अपने आधिकारिक सर्विस आईडेंटिफिकेशन कार्ड और नेशनल आइडेंटिटी दस्तावेज दिखा रहे हैं। ये सैनिक रोते हुए पाक उच्च अधिकारियों से तुरंत मदद की अपील कर रहे हैं।
वीडियो में यूनिफॉर्म पहले एक व्यक्ति हाथ में आईडी कार्ड लेकर कहता सुनाई दे रहा है, ‘आर्मी कैसे कह सकती है कि हम उनके लोग नहीं हैं? यह किसका कार्ड है?’ मेरा आइडेंटिटी कार्ड देखो; पाकिस्तान ने मुझे यह दिया है. मैं रिक्वेस्ट करता हूं, भगवान के लिए, मेरे पिता डिसेबल्ड हैं, और मैं घर में सबसे बड़ा हूं। यह कहकर नाइंसाफी मत करो कि हम तुम्हारे लोग नहीं हैं, अगर तुम यह कहने वाले हो कि हम तुम्हारे लोग नहीं हैं तो तुमने मुझे क्यों भर्ती किया? तुम यह क्यों कह रहे हो कि वीडियो नकली है ?’
सात दिन की डेडलाइन
इस हफ्ते की शुरुआत में ही BLA ने पाकिस्तानी सरकार को सात दिन का अल्टीमेटम दिया था। अगर इस दौरान कैदियों की अदला-बदली के लिए बातचीत नहीं शुरू हुई तो बंदियों को फांसी दिए जाने की सख्त चेतावनी दी गई है। जानकारी के मुताबिक यह डेडलाइन 22 फरवरी को पूरी हो रही है।
बीएलए का कहना है कि ये सभी कैदी ‘ऑपरेशन हेरोफ’ के दूसरे चरण के दौरान पकड़े गए थे। कुछ लोगों को उनकी बलूच जातीय पहचान के आधार पर पहले ही रिहा कर दिया गया था क्योंकि वे स्थानीय पुलिस से जुड़े थे। लेकिन बचे हुए कैदी पाकिस्तानी आर्मी की यूनिट के सदस्य बताए जा रहे हैं जिन पर बलूच नेशनल कोर्ट में औपचारिक कार्रवाई चल रही है।’
पाकिस्तानी सरकार का रुख
पाकिस्तानी आर्मी ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि कोई भी सैनिक लापता नहीं है और न ही किसी की हिरासत में है। अदला-बदली की किसी भी प्रक्रिया को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया गया है।
इसके बावजूद बलूच लिबरेशन आर्मी ने दोहराया कि बातचीत तुरंत शुरू होनी चाहिए क्योंकि अल्टीमेटम में सिर्फ तीन दिन बचे हैं। अगर समय सीमा के अंदर कोई कदम नहीं उठाया गया तो बंदियों की जान खतरे में पड़ सकती है। अब तक न तो पाकिस्तानी मिलिट्री और न ही शहबाज शरीफ सरकार ने इस वीडियो पर कोई आधिकारिक बयान जारी किया है।
संगठन ने याद दिलाया कि पहले भी कई बार कैदियों के आदान-प्रदान का प्रस्ताव दिया गया था लेकिन पाकिस्तानी अधिकारी लगातार उन प्रस्तावों को नजरअंदाज करते रहे ।
