ईरान युद्ध में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठने लगे सवाल

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नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान से जुड़े संघर्ष में पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ ने पाकिस्तान की इस पहल को पूरी तरह बेतुका बताते हुए कड़ी आलोचना की है।

अमेरिकी विशेषज्ञ का बयान 

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने ईरान से जुड़े मौजूदा संकट में खुद को एक संभावित मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश की है। हालांकि, अमेरिकी विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान के पास न तो इस स्तर की कूटनीतिक विश्वसनीयता है और न ही ऐसा प्रभाव, जिससे वह इस जटिल संघर्ष में प्रभावी भूमिका निभा सके।

मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में US आर्मी के रिटायर्ड कर्नल और जियोपॉलिटिकल सलाहकार डगलस मैकग्रेगर ने कहा कि पाकिस्तान की अंदरूनी अस्थिरता और आर्थिक मार के चलते उसे एक भरोसेमंद मध्यस्थ के लायक नहीं समझना चाहिए।

राजनीतिक दिखावा: मैकग्रेगर 

मैकग्रेगर ने कहा कि ईरान, अमेरिका और इजरायल जैसे देशों के बीच चल रहे इस गंभीर टकराव में पाकिस्तान की भूमिका बेहद सीमित है। ऐसे में उसकी मध्यस्थता की पेशकश को गंभीरता से लेना मुश्किल है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस तरह की पहल अधिकतर राजनीतिक दिखावा लगती है, न कि वास्तविक समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम।

इस बीच, क्षेत्र में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समाधान के लिए कई कोशिशें जारी हैं। लेकिन बड़े वैश्विक खिलाड़ियों के बीच मतभेद के कारण किसी ठोस समझौते की संभावना फिलहाल दूर नजर आ रही है।

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