नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : जी 7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर गुरुवार को फ्रांस पहुंच गए। वहां पर वह विश्व के सर्वाधिक संपन्न देशों के विदेश मंत्रियों के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा करेंगे।
वह होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने के तरीके पर चर्चा के साथ ही वैकल्पिक समुद्री मार्गों पर भी विचार-विमर्श करेंगे।
भारत जी 7 देशों के समूह का सदस्य नहीं है लेकिन भारत के महत्व को देखते हुए फ्रांस ने भारतीय विदेश मंत्री को बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है।
बैठक में सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया, ब्राजील और केन्या के विदेश मंत्रियों को भी आमंत्रित किया गया है। इस सूची से दक्षिण अफ्रीका को बाहर रखा गया है।
इस बैठक में स्थायी सदस्य के रूप में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा के विदेश मंत्री भाग ले रहे हैं
माना जा रहा है कि ऐसा अमेरिका के दबाव में किया गया है। इस बैठक में स्थायी सदस्य के रूप में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा के विदेश मंत्री भाग ले रहे हैं।
यह बैठक फ्रांस के अबाया डेस-वाक्स-डी-केर्ने शहर में 26 और 27 मार्च को हो रही है। संभावना है कि जयशंकर जी 7 समूह की बैठक से इतर कई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय मसलों पर भी चर्चा करेंगे।
फ्रांस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार विदेश मंत्रियों की यह बैठक पश्चिम एशिया की स्थिति और उसके तेल व गैस बाजार पर असर पर चर्चा के लिए बुलाई गई है।
वैसे ये विदेश मंत्री तनाव कम करने के तरीकों पर लगातार प्रयास कर रहे हैं और नए समुद्री मार्गों पर विचार करेंगे। जी 7 और तेजी से आगे बढ़ रही अर्थ व्यवस्थाओं वाले देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर भी चर्चा करेंगे।
साथ ही इसके खतरनाक उद्देश्यों से निपटने को तरीके सुझाएंगे। विदित हो कि पश्चिम एशिया से भारत के हित गहराई से जुड़े हुए हैं।
भारत की जरूरत का तेल और गैस बड़ी मात्रा में पश्चिम एशियाई देशों से आता है। नजदीक होने की वजह से इसका भारत पहुंचना आसान और किफायती होता है।
