काठमांडू, एजेंसी : Nepal News : राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के नेता बालेंद्र शाह ने शुक्रवार को नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। महज 35 साल की उम्र में पीएम बनने वाले बालेंद्र शाह के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स अकाउंट का बायो चेंज हो गया। पीएम बालेंद्र शाह के एक्स अकाउंट के बायो में “नेपाल के प्रधानमंत्री, रैपर/स्ट्रक्चरल इंजीनियर/पूर्व मेयर, काठमांडू मेट्रोपॉलिटन हमसे संपर्क करें: +977 9851279900” लिखा है।
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने संविधान के आर्टिकल 76(1) के तहत बालेंद्र शाह को नियुक्त करने के बाद दिन में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस समारोह में देश के उपराष्ट्रपति राम सहाय प्रसाद यादव, चीफ जस्टिस प्रकाश मान सिंह राउत, नेशनल असेंबली के चेयरमैन नारायण प्रसाद दहल, पूर्व प्रधानमंत्री, सीनियर अधिकारी, सिक्योरिटी चीफ और डिप्लोमैटिक कम्युनिटी के सदस्य शामिल हुए।
पहली बार वैदिक-सनातन परंपरा में हुए शपथ समारोह में सात शंख बजाए गए
पीएम बालेंद्र शाह का शपथग्रहण समारोह हिंदू रीति-रिवाज से पूरा हुआ। पहली बार वैदिक-सनातन परंपरा में हुए शपथ समारोह में सात शंख बजाए गए। यह पहली बार है जब मधेसी समुदाय का कोई नेता प्रधानमंत्री बना है।बालेंद्र शाह ने पीएम पद की शपथ लेने से कुछ घंटे पहले गुरुवार को अपना नया रैप सॉन्ग रिलीज किया। यह गाना नेपाल के भविष्य को लेकर उम्मीदों से भरा है। इस गाने को रिलीज होने के कुछ ही घंटों के भीतर बीस लाख से ज्यादा बार देखा गया।
इस गाने में उनके अब तक के सफर की एक झलक है, जब वे ‘अंडरग्राउंड रैप’ की दुनिया में सक्रिय थे और संगीत के जरिए नेपाल में भ्रष्टाचार और दूसरी सामाजिक समस्याओं पर आवाज उठाते थे। बालेंद्र शाह ने पूर्वी नेपाल के झापा-5 में पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को 49,614 वोटों के बड़े अंतर से हराया। उन्हें 68,348 वोट मिले, जबकि ओली को 18,734 वोट मिले। यह 1991 के बाद से नेपाल के संसदीय चुनावों में किसी भी उम्मीदवार को मिले सबसे ज्यादा वोट हैं।
शाह ने 2022 में राजनीति में कदम रखा, जब उन्होंने काठमांडू के मेयर का चुनाव लड़ा और एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीते। 27 अप्रैल 1990 को काठमांडू में एक मधेसी परिवार में जन्मे बालेंद्र शाह ने भारत में विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री ली थी। इंजीनियरिंग में उनके एकेडमिक बैकग्राउंड ने उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर, शहरी विकास और पब्लिक वर्क्स की प्रैक्टिकल समझ दी, जिससे काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी के मेयर के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान उनके गवर्नेंस के तरीके को बनाने में मदद मिली।
