नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : अमेरिकी सेना, ईरान में घुसकर अपने साथी पायलट को बचाने में कामयाब हुई है। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, एक घायल अमेरिकी एयरमैन, जिसका F-15E स्ट्राइक ईगल विमान मार गिराया गया था, ईरान के दुश्मन इलाके में फंस गया था।
इस पायलट का लड़ाकू विमान पहला ऐसा अमेरिकी विमान था जो ईरान की सीमा के भीतर दुर्घटनाग्रस्त हुआ। अमेरिकी सेना के पायलट को बचाने के बाद ट्रंप ने बताया कि वह सैनिक घायल था, लेकिन उसकी हालत स्थिर है।
अमेरिकी पायलट 48 घंटे से ज्यादा समय तक ईरान में फंसा रहा, लेकिन उसने अपनी ट्रेनिंग, इलाके की जानकारी और अपने पक्के अनुशासन के दम पर खुद को अमेरिकी सेना के आने तक जिंदा रखा।
पहाड़ की दरार में छिपा पायलट
अमेरिका के इस पायलट ने ईरान की उन खोजी टीमों को चकमा दिया जो उसके ठिकाने के करीब पहुंच रही थीं। पायलट कभी पहाड़ की दरार में छिपा तो कभी कहीं और, वह लगातार अपनी जगह बदलता रहा।
पायलट के पास एक पिस्तौल, एक कम्युनिकेशन डिवाइस और एक ट्रैकिंग बीकन था। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, एक समय तो वह समुद्र तल से लगभग 7,000 फीट ऊंची पहाड़ी चोटी पर चढ़ गया, ताकि उसके बचने और बचाए जाने की संभावनाएं बढ़ सकें।
अमेरिकी अधिकारियों ने CNN को बताया कि इस एयरमैन ने बचने के उन सभी नियमों का पालन किया जो ठीक ऐसी ही स्थितियों के लिए बनाए गए हैं। किसी की नजर में न आना, जहां तक हो सके संपर्क बनाए रखना और ऐसे इलाके में पहुंचना जहां छिपने की जगह भी हो और जहां से बाहर का नजारा भी दिखता हो।
ईरान ने पायलट को खोजने के लिए रखा इनाम
अकेला और घायल होने के बावजूद, वह ईरान की उन सेनाओं से आगे रहने में कामयाब रहा जो पूरी तरह से उसकी तलाश में जुटी थीं।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारियों द्वारा जानकारी देने वालों को इनाम देने की घोषणा के बाद आम नागरिक भी इस खोज अभियान में शामिल हो गए थे।
अमेरिकी सेना के वरिष्ठ अधिकारी पायलट की हर हरकत पर पल-पल की नजर रख रहे थे। वे खतरों पर नजर रखते हुए, उसे वहां से सुरक्षित निकालने के लिए सही मौके का इंतजार कर रहे थे।
ट्रंप देख रहे थे अमेरिकी सेना का लाइव ऑपरेशन
अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान के लापता चालक दल सदस्य को अमेरिकी विशेष बलों ने 48 घंटे तक चले जटिल सैन्य अभियान के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप अपने सैन्य अधिकारियों के साथ व्हाइट हाउस में ही निगरानी कर रहे थे। उन्हें पल पल की खबर दी जा रही थी। इसी के साथ योजना में भी जरूत के मुताबिक बदलाव किए जा रहे थे।
US की फुल-प्रूफ प्लानिंग
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बचाव अभियान में सैकड़ों विशेष अभियान सैनिक शामिल थे। ए-10 वार्थाग हमलावर विमान, एफ-35 स्टील्थ जेट, एचएच-60डब्ल्यू ‘जोली ग्रीन-2’ रेस्क्यू हेलीकाप्टर, एचसी-130 एयर टैंकर और विशेष कांबैट सर्च एंड रेस्क्यू इकाइयों को तैनात किया गया।
अमेरिकी विमानों ने उस क्षेत्र की ओर बढ़ रहे ईरानी काफिलों पर बमबारी कर रास्ता साफ किया, जबकि ब्लैक हाक हेलीकॉप्टर भारी खतरे के बीच अधिकारी तक पहुंचे। इसमें साइबर और अंतरिक्ष में तैनात सामरिक उपग्रहों की भी मदद ली गई। इससे पायलट की लोकेशन पुख्ता करने में मदद मिली।
एचएच-60डब्ल्यू हेलीकॉप्टर को इस मिशन का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है। यह हेलीकॉप्टर लंबी दूरी तय कर सकता है और खराब मौसम में भी काम करता है। इसमें मजबूत सुरक्षा और बचाव के लिए खास उपकरण लगे होते हैं। इसी के जरिए एयरमैन को दुश्मन के इलाके से सुरक्षित निकाला गया।
दो दिन तक चला खतरनाक ऑपरेशन
रिपोर्ट के अनुसार, इस बचाव अभियान में सैकड़ों स्पेशल आपरेशन सैनिक शामिल थे। ये टीम ईरान के अंदर गहराई तक गई और अधिकारी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। यह ऑपरेशन रात में शुरू हुआ और पूरे दिन चला।
बताया गया है कि इस मिशन के दौरान अमेरिकी विमानों ने ईरानी सैन्य काफिलों को दूर रखने के लिए बमबारी और फायरिंग भी की।
ट्रंप की निगरानी का ही नतीजा रहा कि ईरान में खराब हवाई पट्टी में सैन्य परिवहन विमानों के फंसने के बाद तत्काल मौके पर दूसरे सहायता विमान भेजे गए।
दोनों पायलटों ने किया था कमांड सेंटर से संपर्क
रिपोर्ट के मुताबिक, विमान गिरने के बाद दोनों क्रू सदस्यों ने संपर्क किया था। इसके लिए हर सैन्य पायलट के पास बीकन और सुरक्षित संचार उपकरण होता है। इसके चलते मुख्य पायलट को कुछ घंटों में बचा लिया गया था, जबकि दूसरे सदस्य को ढूंढने में ज्यादा समय लगा।
इस बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने भटकाने की रणनीति भी अपनाई, ताकि ईरानी बलों को गलत जानकारी मिले।बाद में सटीक लोकेशन मिलने पर स्पेशल फोर्स को भेजा गया और आपरेशन पूरा किया गया। ट्रंप ने कहा कि एयरमैन दुश्मन के इलाके में अकेला नहीं था, क्योंकि उसकी लोकेशन पर लगातार नजर रखी जा रही थी और बचाव की योजना बनाई जा रही थी।
