नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का प्रशासन अब नए कूटनीतिक विकल्पों पर विचार करता दिखाई दे रहा है। ट्रंप ने दावा किया है कि लेबनान में हिंसा रोकने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने के उद्देश्य से अमेरिका ने ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्ला से सीधे संपर्क साधा है।
यह दावा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका लंबे समय से हिजबुल्ला को विदेशी आतंकी संगठन घोषित करता रहा है। उधर, ईरान ने भी लेबनान पर इजरायली कार्रवाई रोकने का पूरा दबाव बना रखा है। लेबनान से युद्धविराम के बावजूद इजरायल के हमले जारी रहे। हवाई हमले में छह लेबनानी नागरिकों की मौत की खबर है।
तेल की कीमत आसमान पर
ओमान ने जानकारी दी कि ड्रोन हमले की वजह से प्रभावित मीना अल फहल बंदरगाह से तेल आपूर्ति बहाल कर दी गई है। इस खबर से तेल की कीमतें एक प्रतिशत तक गिरकर 94 डॉलर के आसपास आ गईं। बता दें कि ओमान आठ से नौ लाख बैरल कच्चा तेल इस टर्मिनल से निर्यात होता है। ओमान ने ईरान के साथ संबंध तोड़ने के अमेरिका के दबाव को खारिज कर दिया है।
ओमान का कहना है कि वह ईरान के साथ वह होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए भविष्य की प्रबंधन प्रणाली पर बातचीत कर रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप होगी। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि लेबनान में शांति बहाल करने के प्रयासों में कुछ प्रगति हुई है। उन्होंने संकेत दिया कि यह पहल ईरान से जुड़े व्यापक क्षेत्रीय घटनाक्रमों और संभावित कूटनीतिक समाधान का हिस्सा है।
ट्रंप ने हिजबुल्ला से संपर्क साधा
जब उनसे हिजबुल्ला द्वारा अमेरिका समर्थित शांति प्रस्ताव ठुकराए जाने संबंधी रिपोर्टों पर सवाल पूछा गया तो ट्रंप ने कहा कि संगठन ने प्रस्ताव को अस्वीकार नहीं किया है। उनके अनुसार, हिजबुल्ला की ओर से संपर्क कर संघर्ष विराम की संभावना पर चर्चा की गई है और आने वाले समय में हालात में बदलाव देखने को मिल सकता है।
ट्रंप ने कहा कि लेबनान लंबे समय से अस्थिरता और संघर्ष का सामना कर रहा है तथा वहां शांति स्थापित होना पूरे क्षेत्र के लिए सकारात्मक होगा। उन्होंने बताया कि इस विषय पर उनकी इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सहित क्षेत्र के अन्य नेताओं से भी चर्चा हुई है।
राष्ट्रपति ने लेबनान के घटनाक्रमों को ईरान से जुड़े व्यापक क्षेत्रीय समीकरणों से जोड़ते हुए कहा कि पश्चिम एशिया के विभिन्न संघर्ष एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। एक दिन पहले उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि वह ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व से संवाद के पक्षधर हैं।
ट्रंप की टिप्पणियां इसलिए भी उल्लेखनीय हैं क्योंकि यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से हिजबुल्ला के साथ प्रत्यक्ष बातचीत की बात स्वीकार की है। पूर्व अमेरिकी प्रशासन आमतौर पर ऐसे किसी संपर्क को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने से बचते रहे हैं।
ईरान युद्ध पर झटकों से दबाव में ट्रंप
ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की अपने देश में काफी आलोचना हो रही है। बीते बुधवार को अमेरिका की रिपब्लिकन बहुल प्रतिनिधि सभा ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के खिलाफ एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई समाप्त करने और अमेरिकी सैनिकों की वापसी की मांग की गई है। प्रस्ताव के पक्ष में 215 और विरोध में 208 वोट पड़े। प्रस्ताव के समर्थन में चार रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट्स का साथ दिया।
प्रस्ताव में कहा गया है कि यदि कांग्रेस औपचारिक रूप से युद्ध की घोषणा नहीं करती या सैन्य कार्रवाई की अनुमति नहीं देती, तो राष्ट्रपति को ईरान से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाना होगा। हालांकि यह प्रस्ताव अभी प्रतीकात्मक माना जा रहा है, क्योंकि इसे कानून बनने के लिए सीनेट से भी मंजूरी मिलनी आवश्यक है।
