न्यूयार्क, डिजिटल डेस्क :गुलाम जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) इस समय सरकारी दमन, हिंसा और मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन की आग में झुलस रहा है। आगामी क्षेत्रीय चुनावों से पहले सुरसा की तरह बढ़ते इस संकट पर वैश्विक मानवाधिकार संस्था ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ और 40 से अधिक ब्रिटिश सांसदों ने गहरी चिंता जताते हुए पाकिस्तानी हुकूमत को कठघरे में खड़ा किया है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को बंदूक के दम पर कुचलने और नागरिक अधिकारों को बंधक बनाने की पाकिस्तान की इस दमनकारी नीति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हंगामा खड़ा कर दिया है। घाटी में खौफ का साया: इंटरनेट बंद, सेना तैनात पीओजेके में हालात तब और बिगड़ गए जब ‘ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (जेएएसी) और प्रशासन के बीच बातचीत विफल हो गई। इसके बाद, पाकिस्तानी सरकार ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए इस नागरिक संगठन को ‘आतंकवादी’ घोषित कर दिया। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे पूरी तरह गैर-कानूनी और अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा हमला बताया है। 27 जुलाई को होने वाले चुनावों की आड़ में पूरी घाटी को छावनी में बदल दिया गया है। पांच जून से इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं पूरी तरह ठप हैं, लोगों की आवाजाही पर पाबंदी है और पर्यटकों को जबरन बाहर निकाल दिया गया है। भारी संख्या में अर्धसैनिक बलों की तैनाती करके पूरे क्षेत्र को दुनिया से अलग-थलग कर दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजी आवाज: ब्रिटिश सांसदों की दोटूक इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (आईएचआरएफ) ने कहा, ‘एक नागरिक संगठन को खोखले दावों के आधार पर ‘आतंकवादी’ बताना और पूरे क्षेत्र को बाहरी दुनिया की नजरों से छिपा देना, मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।’ इस अमानवीय लाकडाउन और बर्बरता के खिलाफ अब ब्रिटेन में भी आक्रोश है। 40 से अधिक ब्रिटिश सांसदों ने पाकिस्तानी मंत्रियों से मिलकर इस दमन को तुरंत रोकने की मांग की है। ब्रिटिश सांसदों ने वहां फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षा और संचार माध्यमों को तुरंत बहाल करने पर जोर दिया है। मानवाधिकार संगठनों ने प्रदर्शनकारियों की मौतों की स्वतंत्र जांच और सामूहिक गिरफ्तारियों को तुरंत रोकने की मांग करते हुए पाकिस्तान को चेताया है कि वह लोकतंत्र का गला घोंटना बंद करे। Post navigation ओमान के पास जहाज पर हमला, 3 भारतीय लापता, 21 को बचाया गया 12 वर्षों में फाल्टा एसईजेड की बड़ी छलांग, निर्यात आठ गुना बढ़कर 85 हजार करोड़ के पार