नई दिल्ली, एंटरटेनमेंट डेस्क, : रामायण (Ramayana) ऋषि वाल्मीकि द्वारा रचित एक संस्कृत महाकाव्य है, जिसमें भगवान राम के जीवन, उनके आदर्शों और धर्म की नींव की कहानी बताई गई है। इसमें सात कांड (अध्याय) और लगभग 24,000 श्लोक हैं। यह हिंदू महाकाव्य लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। असम का रामायण से क्या है संबंध? हाल ही में, नितेश तिवारी की ‘रामायण’ के रिलीज होने ने इस विषय पर चर्चा फिर छेड़ दी है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो ने काफी ध्यान खींचा, जिसमें इतिहासकार डॉ. सौरदीप नाथ ने रणवीर इलाहाबादिया के ‘बीयरबाइसेप्स पॉडकास्ट’ के एक एपिसोड में कहा कि असम का रामायण से संबंध है। क्या है उनका आधार और इसके पीछे की कहानी, चलिए समझते हैं। रामायण में मिलता है इसका संदर्भ इतिहासकार और लेखक डॉ. सौरदीप नाथ ने हाल ही में रणवीर इलाहाबादिया के ‘बीयरबाइसेप्स पॉडकास्ट’ के एक एपिसोड में असम की समृद्ध ऐतिहासिक और पौराणिक जड़ों पर रोशनी डाली। बातचीत के दौरान, डॉ. नाथ ने बताया कि कैसे प्राचीन हिंदू ग्रंथों, खासकर रामायण में मिलने वाले संदर्भ अक्सर उस इलाके से जुड़े होते हैं जिसे आज असम के नाम से जाना जाता है, और इस तरह उन्होंने असम के गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को उजागर किया। सदियों पुरानी है असम की सभ्यता डॉ. नाथ के अनुसार, प्राचीन राज्य प्रागज्योतिषपुर जिसके बारे में आम तौर पर माना जाता है कि वह आज के असम में स्थित था का जिक्र रामायण और महाभारत समेत कई हिंदू धर्मग्रंथों में मिलता है। उन्होंने बताया कि भले ही अहोम राजवंश ने 13वीं से 19वीं सदी तक असम पर शासन किया और राज्य के लिखित इतिहास का एक बड़ा हिस्सा तैयार किया, लेकिन असम की सभ्यता और सांस्कृतिक पहचान अहोम काल से कई सदियों पुरानी है। Post navigation भारत-पाकिस्तान मैच में एशियन लीजेंड्स लीग में भारत ने पाक को हराया Kanpur : बारिश से सड़कों और गलियों में भर गया पानी, लोगों को हुई परेशानी