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मुंबई, डिजिटल डेस्क : सैन्यकर्मियों की कहानियां तो अलग-अलग माध्यम पर बहुत आई हैं, लेकिन टीवी पर पहली बार आर्मी अस्पताल की कहानी आने वाली है। अभिनेता गश्मीर महाजनी जल्द ही कश्मीर की पृष्ठभूमि पर आधारित कलर्स के नए शो ‘108 बेस हास्पिटल: उरी’ (108 Base Hospital: URI) में डॉक्टर की भूमिका निभाते नजर आएंगे।

गश्मीर महाजनी (Gashmeer Mahajani) के अनुसार इस भूमिका ने उन्हें भारतीय सेना के समर्पण, अनुशासन और मानवीय संवेदनाओं को करीब से समझने का अवसर दिया। विभिन्न मुद्दों पर स्मिता श्रीवास्तव ने उनसे की बातचीत…

कश्मीर से कैसा आकर्षण रहा है ?

इस शो की वजह से मैं पहली बार कश्मीर आया। एक पूरा फाइट सीक्वेंस यहां शूट किया है। धारावाहिक में हीरो-हीरोइन की पहली और आखिरी मुलाकात भी कश्मीर में होती है। पहली बार सेना की वर्दी पहनी है। सुपरहीरो की कास्ट्यूम पहनने से छाती इतनी चौड़ी नहीं होती है, जितनी आर्मी यूनिफॉर्म पहनने के बाद हो जाती है।

एक्शन से कितना लगाव रहा है ?

बहुत ज्यादा, लेकिन एक्शन को भावनाओं का सहारा मिलना चाहिए, नहीं तो एक समय के बाद केवल मारधाड़ बोरिंग हो जाएगी। मारधाड़ का कोई उद्देश्य होना चाहिए। पहली बार मैंने टीवी के लिए इतनी शिद्दत से काम करने वाली टेक्निकल टीम देखी है। कैमरा, निर्देशन की टीम कमाल है।

ज्यादातर टीवी में ऐसा होता है कि पहले 10 एपिसोड के लिए सेटअप लगा देते हैं, बाकी फिर फ्लोर डायरेक्टर संभालते है। मुख्य डायरेक्टर अहम सीन के लिए आते हैं। इस शो पर निर्देशक छोटे से छोटे सीन के लिए मेहनत कर रहे हैं। यह बेहद चौंकाने वाला था कि निर्देशक रिलैक्स होकर नहीं बैठ रहे हैं।

आर्मी अफसरों से बात करने का मौका मिला ?

हां, वे बहुत प्यार और गर्मजोशी से मिलते हैं। परिवार से दूर अपने देश के लिए यहां तैनात रहना, कठिन काम है। हम शहर में रहने वाले छोटी-छोटी चीजों को लेकर तनाव ले लेते हैं। हमारी मानवता कहीं खो जाती है। आक्रामक हो जाते हैं। जब आर्मी को मैंने कश्मीर में देखा, समझ आया कि वे हमसे कई गुना ज्यादा मेहनत कर रहे हैं। फिर भी वे गर्मजोशी से मिलते हैं। उनकी ऊर्जा को सलाम है। असल जिंदगी में

सबसे बहादुरी का काम आपने क्या किया है ?

मैंने शादी कर ली। एक बच्चे का पिता हूं, उसका पालन-पोषण कर रहा हूं। यह बहादुरी का काम है।

आपका बेटा आपको अभिनय करते हुए देखकर क्या कहता है ?

वह बहुत उत्सुक होता है और कहता है कि मैं भी एक्टर बनूंगा। हालांकि, अभी तो वह सात साल का है। घर पर उसे बहुत ज्यादा स्क्रीनटाइम नहीं दिया जाता है। यह शो दिखाऊंगा, क्योंकि इसमें मैंने सेना की वर्दी पहनी है। मैंने एक मराठी ऐतिहासिक फिल्म ‘सरसेनापती हंबीरराव’ में छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति संभाजी महाराज का डबल रोल किया था।

तब से उनके लिए स्पाइडरमैन और सुपरमैन से ज्यादा छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति संभाजी महाराज उनसे बड़े हीरो बन गए हैं। मैं चाहूंगा कि वह एक आर्मी अफसर को हीरो के स्तर पर देखे बजाय स्पाइडरमैन और बैटमैन के। बेटे के लिए उसका पिता हमेशा हीरो होता है। मुझे आर्मी अफसर की वर्दी में देखे तो वह वर्दी का सम्मान करे और उसकी कीमत समझे।

आपको लगता है कि बच्चों के लिए कंटेंट कम है। उनके लिए कुछ बनाएंगे ?

हां, हमारे पुराणों में ऐसी कहानियां हैं, जो बच्चों का मनोरंजन भी कर सकती है और उन्हें कुछ सिखा भी सकती हैं तो बनाना चाहिए। वैसे अभी कोई योजना नहीं है। मैं उससे कहता हूं कि ऐसी फिल्म बनाऊंगा, जो तुम देख पाओगे। फिलहाल तो एक्शन ड्रामा फिल्म बना रहा हूं। इस शो के बाद उसकी शूटिंग शुरू करूंगा।