वाशिंगटन,डिजिटल डेस्क: नाटो शिखर सम्मेलन से अमेरिका लौटते समय राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को तुर्किए से ब्रिटेन तक एयर फोर्स वन के बजाय एक अन्य सैन्य विमान से ले जाया गया था। इस पूरे सुरक्षा अभियान की जानकारी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो को पहले से थी। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि जानकारी होने के बावजूद रूबियो ट्रंप के साथ उसी विमान में क्यों नहीं गए। अचानक बदला ट्रंप का प्लेन ट्रंप नाटो शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए कतर से मिले विशेष विमान से अंकारा पहुंचे थे। वापसी के दौरान अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को ट्रंप पर ईरानी हमले की आशंका से जुड़ी जानकारी मिली थी। इसके बाद अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने सुरक्षा कारणों से ट्रंप को एयर फोर्स वन से अलग कर दूसरे सैन्य विमान सी-32ए से ब्रिटेन भेजने का फैसला किया। लेकिन बाद में उन्हें चुपचाप एक कंटेनर ट्रक के जरिए दूसरे सैन्य विमान तक पहुंचाया गया अंकारा में ट्रंप पहले एयर फोर्स वन में सवार हुए थे। लेकिन बाद में उन्हें चुपचाप एक कंटेनर ट्रक के जरिए दूसरे सैन्य विमान तक पहुंचाया गया। इस विमान में ट्रंप के साथ कुछ चुनिंदा सुरक्षाकर्मी थे। अंकारा से ब्रिटेन तक उनकी सुरक्षा के लिए एफ-16 लड़ाकू विमानों को भी तैनात किया गया था। दूसरी ओर, एयर फोर्स वन में विदेश मंत्री मार्को रूबियो, वाणिज्य मंत्री स्काट बेसेंट, अन्य अमेरिकी अधिकारी और पत्रकार सवार थे। ब्रिटेन पहुंचने के बाद ट्रंप फिर एयर फोर्स वन में सवार हुए और अमेरिका लौटे। ट्रंप ने बाद में विमान बदलने की पुष्टि करते हुए कहा कि वह सीक्रेट सर्विस और सेना की सलाह मानते हैं। उनके मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने उनसे दूसरे विमान से जाने को कहा था और उन्होंने वैसा ही किया। खुफिया जानकारी की विश्वसनीयता पर था सवालइस पूरे घटनाक्रम में खुफिया जानकारी को लेकर भी सवाल उठे हैं। वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, ट्रंप पर हमले की आशंका से जुड़ी जानकारी इजरायल से मिली थी। सीआईए के विश्लेषकों ने इसे तत्काल हमले का पक्का संकेत नहीं माना था सीआईए के विश्लेषकों ने इसे तत्काल हमले का पक्का संकेत नहीं माना था और ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों को अपनी आपत्ति से अवगत कराया था। एक अमेरिकी अधिकारी ने भी इस जानकारी को अमेरिका द्वारा तैयार खुफिया आकलन के बजाय इजरायल से मिली सूचना बताया और इसकी विश्वसनीयता पर कम भरोसा जताया। इसके बावजूद सीक्रेट सर्विस ने जोखिम लेने के बजाय ट्रंप की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। ट्रंप पर पहले हुए हमलों और ईरान से लंबे समय से चले आ रहे खतरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने अतिरिक्त सावधानी बरती। अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, रूबियो को इजरायली खुफिया जानकारी और ट्रंप को दूसरे विमान से ले जाने की सीक्रेट सर्विस की योजना की जानकारी थी। ट्रंप को 2020 में ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी की अमेरिकी कार्रवाई में मौत के बाद से ईरान से खतरा माना जाता रहा है। हालिया घटनाक्रमों के बाद यह खतरा और गंभीर माना गया। ऐसे में खुफिया जानकारी पर पूरी तरह भरोसा न होने के बावजूद सीक्रेट सर्विस ने ट्रंप की यात्रा का तरीका बदलने का फैसला किया। Post navigation अकाली नेता सुखबीर बादल पर जानलेवा हमला, अस्पताल में भर्ती नेपाल ने खो दिए भारत के साथ 210 साल पुराने ‘सुगौली संधि’ के दस्तावेज