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नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) में अनियमितताओं और चुनाव आयोग के आंतरिक फैसलों को लेकर उठे विवाद के बीच इंडी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

आज यानी शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रतीकात्मक जन महाभियोग कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार कर रही हैं।

इंडी गठबंधन की यह बैठक रामलीला मैदान में विपक्ष की प्रस्तावित दिल्ली चलो रैली से ठीक एक दिन पहले उठाया गया है, जहां विपक्षी दल सीईसी के इस्तीफे की मांग को पुरजोर तरीके से उठाने की तैयारी में हैं।

दरअसल, इंडी गठबंधन ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर ‘मॉक संसद’ बुलाई है। यह मॉक संसद रामलीला मैदान में विपक्ष की प्रस्तावित दिल्ली चलो रैली से ठीक एक दिन पहले उठाया गया है, जहां विपक्षी दल सीईसी के इस्तीफे की मांग को पुरजोर तरीके से उठाने की तैयारी में हैं। पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार बतौर अध्यक्ष ने इस मॉक सत्र की शुरुआत की।

कार्यक्रम को विपक्ष ने ‘जन महाभियोग’ नाम दिया

मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम को विपक्ष ने ‘जन महाभियोग’ नाम दिया है। आयोजन के जरिए विपक्ष कथित वोट चोरी और वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर अपनी आपत्तियां उठाएगा।

मीरा कुमार ने कहा, ‘हमारा लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका समेत दुनिया भर के देश हमारी ओर देखते हैं और हमारे लोकतांत्रिक मॉडल का अनुसरण करते हैं। हमारा लोकतंत्र चुनावों की शक्ति से चलता है, और इस चुनावी शक्ति के केंद्र में मतदाता की आत्मा बसती है।

पूरी चुनावी प्रक्रिया में मतदाता ही केंद्र-बिंदु होता है। यदि किसी एक मतदाता को भी वोट डालने के अधिकार से वंचित किया जाता है, तो यह हमारे लोकतंत्र की आत्मा पर प्रहार है। किसी को वोट डालने से रोकना हमारे लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाता है।’

रातों-रात की गई SIR की घोषणा

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ‘ECI ने रातों-रात SIR की घोषणा कर दी। इसे पूरे देश में लागू किया गया, जिसका असल मकसद BJP के विरोधियों के वोट हटाना था। मोदी सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए बाहरी लोगों और घुसपैठियों का बहाना ले रही है।

उनका आरोप है कि हम घुसपैठियों को शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं है, हम तो बस असली और वैध मतदाताओं के नाम बने रहने की वकालत कर रहे हैं। हम ऐसा उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कर रहे हैं।

हमारी मांग है सीईसी को तत्काल पद से हटाकर 2023 का कानून रद हो। SIR को रोका जाए। संविधान बनाने वालों ने वोट का अधिकार सबको दिया है। हर नागरिक को बराबरी का दर्जा दिया।’

खड़गे ने आगे कहा कहा, ‘उदाहरण के लिए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम या फ्रांस को ही लें। इनमें से कई देशों में, लोकतंत्र की स्थापना के तुरंत बाद महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं दिया गया था।

लेकिन भारत एक ऐसा देश है, जिसने अपना संविधान लागू होते ही सभी को यह अधिकार दे दिया। इसने महिलाओं, दलितों, वंचितों और गरीबों को – उनकी पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना यह अधिकार दिया। उस समय भी, RSS ने इस अधिकार पर आपत्ति जताई थी और इसका विरोध किया था।