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वाशिंगटन, डिजिटल डेस्क : भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय असैन्य परमाणु सहयोग को नई ऊंचाइयां देने के लिए आपसी चर्चा तेज कर दी है।

वाशिंगटन में परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अजीत कुमार मोहंती और अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के बीच हुई यह उच्च स्तरीय बैठक वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

निजी भागीदारी व 2047 का महत्वाकांक्षी लक्ष्य

भारत सरकार ने अपने असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोल दिया है। देश का लक्ष्य वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का है।

इस दूरदर्शी नीति ने अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों का ध्यान आकर्षित किया है, जो भारतीय बाजार में निवेश और साझेदारी के लिए बेहद उत्सुक हैं। यह सहयोग दोनों देशों के लिए साझा समृद्धि के द्वार खोलेगा।

‘एटलस’ पहल : समुद्री ऊर्जा में नवाचार

यह बैठक अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की ‘एटामिक टेक्नोलोजीज लाइसेंस्ड फार एप्लीकेशन ऐट सी’ (‘एटलस’) पहल के शुभारंभ से ठीक पहले हुई।

इस अनूठी पहल का उद्देश्य नागरिक जहाजों को ऊर्जा देने और अपतटीय ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्माल माड्यूलर रिएक्टर्स की संभावनाओं तलाशना है। इससे वैश्विक समुद्री उद्योग को लंबी अवधि की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ विकल्प मिलेंगे।

बैठक के दौरान दोनों ने कानूनी और नियामक ढांचे, सुरक्षा, संरक्षा और दायित्वों जैसे अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका की यह साझेदारी न केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि पूरी दुनिया को एक हरित और सुरक्षित भविष्य की ओर ले जाने में अहम भूमिका निभाएगी।

परमाणु ऊर्जा और समुद्री क्षेत्रों का यह अनूठा संगम भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार कर रहा है।