कोलकाता, ब्यूरो : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंक दिया गया है। राज्य में पहली बार दो चरणों में चुनाव होने जा रहे हैं। इसके मद्देनजर भाजपा ने सोमवार को 144 प्रत्याशियों वाली अपनी पहली लिस्ट जारी की। इसमें सुवेंदु अधिकारी को नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस ने भी 294 में से 291 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा की। टीएमसी ने शेष 3 सीटें अपने सहयोगी अनित थापा के नेतृत्व वाली भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा के लिए छोड़ दी हैं। गौर करने वाली बात ये है कि इस बार ममता ने अपने लिए नंदीग्राम की जगह भवानीपुर को चुना है। नंदीग्राम से हार गई थीं ममता दरअसल पिछले विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम में ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच कांटे की टक्कर हुई थी। लेकिन नतीजे ममता के पक्ष में नहीं आए थे। कभी ममता के ही बेहद करीबी माने जाने वाले सुवेंदु ने ममता को उन्हीं के गढ़ में शिकस्त दे दी थी। ममता ने भले ही यह चुनाव मात्र 1956 वोटों के अंतर से गंवा दिया हो, लेकिन इसका संदेश जनता के बीच काफी स्पष्ट गया था। 2021 विधानसभा चुनाव के नतीजों में टीएमसी ने भले ही 213 सीटें जीतकर सत्ता की हैट्रिक लगाई हो और भाजपा को 77 सीटों से संतोष करना पड़ा हो, लेकिन भाजपा के लिए यह बड़ी छलांग थी। 2016 के रिजल्ट से तुलना करें, तो तब भाजपा को सिर्फ 3 सीटें मिली थीं। यह इस बात का भी स्पष्ट प्रमाण था कि बंगाल में कम्युनिस्ट पार्टियां और कांग्रेस बुरी तरह कमजोर हो गई थीं। क्यों चुनी भवानीपुर सीट ? बाद में ममता ने भवानीपुर सीट से उपचुनाव लड़ा और भाजपा की प्रियंका टिबरेवाल को रिकॉर्ड अंतर से हराया था। अब 2026 के चुनाव के लिए भाजपा ने पहले ही कमर कस ली थी। भाजपा को पता था कि ममता नंदीग्राम या भवानीपुर में से किसी एक सीट को चुनेंगी। रणनीति के मुताबिक, भाजपा ने सुवेंदु को दोनों ही सीटों से उम्मीदवार बना दिया। यहां टीएमसी के लिए दुविधा की स्थिति पैदा हो गई थी। ममता 2021 में नंदीग्राम से चुनाव हार चुकी थीं, ऐसे में उन्हें वहां से दोबारा टिकट देकर टीएमसी कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती थी। अगर ममता को किसी तीसरी सीट से उतारा जाता, तो जनता में यह संदेश जाता कि वह सुवेंदु के खिलाफ चुनाव लड़ने से कतरा रही हैं। भाजपा भी इस मुद्दे को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ती और चुनावी नतीजों पर इसका नकारात्मक असर देखने को मिल सकता था। लिहाजा तृणमूल ने भवानीपुर सीट को ही ममता के लिए सबसे सुरक्षित माना। हालांकि सुवेंदु दोनों सीटों पर अपनी जीत को लेकर काफी उत्साहित हैं। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत मिलेगी। एक ओर जहां भाजपा ने दिग्गज चेहरों पर भरोसा जताया है, वहीं टीएमसी ने लिस्ट में युवाओं को तरजीह दी है। किसकी रणनीति कितनी कारगर साबित हुई, यह 4 मई को घोषित होने वाले नतीजों से स्पष्ट हो जाएगा। Post navigation हल्की बारिश और तेज हवाओं का असर, NCR में सुधर रहा AQI हरियाणा राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोट करने वाले विधायक इस्तीफ़ा दे – हुड्डा