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नई दिल्ली,डिजिटल डेस्क : नासा के वैज्ञानिकों को चंद्रमा की सतह पर एक नया गड्ढा (क्रेटर) मिला है। कहा जा रहा है कि यह ‘सदी में एक बार’ होने वाली टक्कर से बना है। ‘मैकगेचिन’ (McGetchin) नाम का यह गड्ढा 728 फीट (222 मीटर) चौड़ा है और 141 फीट (43 मीटर) गहरा है। 

इसका पता NASA के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (LRO) से चला है। इस क्रेटर का नाम चांद पर रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों में से एक, टॉम मैकगेचिन के नाम पर रखा गया है।

NASA ने एक बयान में कहा कि वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पूरे सोलर सिस्टम में अब तक खोजा गया सबसे बड़ा नया बना क्रेटर है। ‘साइंस एडवांसेज’ में अपनी खोज के बारे में एक पेपर पब्लिश करने वाले रिसर्चर्स के अनुसार, जिस टक्कर से यह क्रेटर बना, वह 11 अप्रैल और 22 मई, 2024 के बीच कभी हुई होगी।

वैज्ञानिकों का कहना है कि लगभग दो अमेरिकन फुटबॉल मैदानों के आकार का यह क्रेटर, शायद तीन से छह मंजिला इमारत के आकार के किसी धूमकेतु या एस्टेरॉयड के चांद से टकराने की वजह से बना होगा।

कैसे हुई नए क्रेटर की खोज ?

LRO प्रोब को यह गड्ढा ‘एक बड़े चमकदार धब्बे’ जैसा दिखा, जिसके चारों ओर एक गहरा घेरा (halo) था। यह प्रोब 2009 से ही चंद्रमा का अध्ययन कर रहा है।

इसकी खोज NASA के वैज्ञानिकों ने ‘रूटीन डेटा-क्वालिटी चेक’ के दौरान की। इस दौरान NASA के LRO से जुड़े वैज्ञानिक रॉबर्ट वैगनर अपनी कंप्यूटर स्क्रीन पर चंद्रमा का एक विशाल नक्शा देख रहे थे।

NASA के एक बयान के मुताबिक, उनकी नजर एक असामान्य रूप से बड़े चमकदार धब्बे पर पड़ी, जिसके चारों ओर एक गहरा घेरा था। इससे पता चला कि उस इलाके की सतह की जमीन हिल गई थी।

मून मिशन का बदलेगा रुख 

वैगनर ने कहा, ‘मैंने बस सब कुछ रोक दिया और यह पता लगाने लगा कि वह जगह क्या था।’ इसके बाद वैगनर ने चांद की पहले और बाद की तस्वीरों की तुलना की और उन्हें एहसास हुआ कि उन्होंने सौर मंडल में अब तक का सबसे बड़ा और नया बना क्रेटर खोज लिया है।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि चांद पर इतनी जोरदार टक्कर सदी में एक बार या उससे भी कम बार होती है। हालांकि चांद पर कई क्रेटर हैं, जिनमें से कई ‘मैकगेचिन’ (McGetchin) से कहीं ज्यादा बड़े हैं, लेकिन किसी क्रेटर के बनने की प्रक्रिया पर असल समय में रिसर्च करने से चांद की जियोलॉजी को समझने में मदद मिल सकती है।

इससे भविष्य में चांद पर इंसानों को भेजने वाले मिशन की बेहतर तैयारी हो सकती है, जिनकी योजना अभी अमेरिका और चीन दोनों बना रहे हैं। पृथ्वी के उलट, चांद पर वायुमंडल की कोई परत नहीं है, इसलिए अंतरिक्ष का मलबा सतह से टकराने से पहले धीमा नहीं होता और न ही जलकर खत्म होता है।