gulam-jammu-kashmir

नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : गुलाम जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर तनाव भड़क गया है। अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे आंदोलनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों में चार पुलिसकर्मियों और सात नागरिकों समेत 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि 70 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल है। मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। सिविल सोसाइटी समूहों के प्रतिबंधित गठबंधन ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने आर्थिक o राजनीतिक मांगों को लेकर मंगलवार को आंदोलन का आह्वान किया है।

इसे कुचलने के लिए पाकिस्तानी रेंजर, पंजाब पुलिस व सेना लगा दी गई है। प्रेट्र के अनुसार, विवाद की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब एक व्यापारी की पुलिसकर्मियों से कथित तौर पर कहासुनी हो गई और उसे गोली मार दी गई। बाद में उसका शव रावलकोट के कंबाइंड मिलिट्री हास्पिटल लाया गया, जहां जेएएसी समर्थक बड़ी संख्या में एकत्र हो गए।

इसी दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प शुरू हो गई

इसी दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प शुरू हो गई। पुंछ सेक्टर के कमिश्नर सरदार वहीद खान के अनुसार, असामाजिक तत्वों की फायरिंग में चार पुलिसकर्मियों और एक राहगीर की मौत हुई। इसके बाद सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में छह प्रदर्शनकारी मारे गए।

पुलिस प्रमुख लियाकत मलिक ने बताया कि घटना में 23 सुरक्षाकर्मी और 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। साथ ही 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। रायटर के अनुसार, जेएएसी प्रमुख शौकत नवाज मीर ने एक्स पर साझा एक वीडियो में आरोप लगाया कि रावलकोट में सरकार ने उनके समर्थकों के खिलाफ नरसंहार शुरू कर दिया है।

उन्होंने कहा कि नौ जून को प्रस्तावित लाकडाउन कार्यक्रम के लिए संगठन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राजनीतिक कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने संयुक्त राष्ट्र से क्षेत्र में मानवीय और राजनीतिक संकट के बीच हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने एक वीडियो संदेश में रावलकोट में शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर हिंसक दमनचक्र को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।

आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी रेंजर, पंजाब पुलिस और सैन्य इकाइयां भी झोंकी जा रही हैं

उन्होंने कहा कि आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी रेंजर, पंजाब पुलिस और सैन्य इकाइयां भी झोंकी जा रही हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने पर भी सवाल उठाए। हालांकि कमिश्नर खान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जेएएसी नेतृत्व घटना को नरसंहार का रूप देकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।

प्रशासन का दावा है कि जब सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने का प्रयास किया तो कुछ लोगों ने आटोमैटिक राइफलों, पेट्रोल बमों और अन्य हथियारों से हमला कर दिया। जेएएसी की प्रमुख मांगों में 2027 में प्रस्तावित क्षेत्रीय विधानसभा चुनावों में कुल 45 सीटों में से 12 सीटें शरणार्थियों के लिए आरक्षित करने की व्यवस्था समाप्त करना शामिल है।

आरोप है कि इन सीटों पर ऐसे उम्मीदवार चुनाव लड़ते हैं जो क्षेत्र में नहीं बल्कि पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहते हैं।

शुक्रवार को क्षेत्रीय सरकार ने आतंकवाद-रोधी कानून के तहत जेएएसी को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया था। साथ ही घरेलू और विदेशी पर्यटकों को नौ जून से पहले क्षेत्र छोड़ने की सलाह भी जारी की गई थी।

एक साथ कई मोर्चों पर मुनीर को चुनौती

विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व पर एक साथ कई मोर्चों का दबाव बढ़ता जा रहा है। पश्चिमी सीमा पर सुरक्षा चुनौतियों, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसी गतिविधियों के बीच पीओके में बढ़ता असंतोष सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के लिए नई चुनौती बनकर उभरा है।

लोगों का आरोप है कि क्षेत्र के संसाधनों का दोहन तो किया जा रहा है, लेकिन विकास और बुनियादी सुविधाओं में उपेक्षित रखा गया है। यहां के संसाधनों का इस्तेमाल खैबर पख्तूनख्वा व बलूचिस्तान में किया जा रहा है।