IPL में छोटी बाउंड्री पर भड़के सुनील गावस्कर

Sunil-Gavaskar

सुनील गावस्कर कॉलम : इस आईपीएल में हमने पहले के संस्करणों की तुलना में कहीं अधिक शतक लगते देखे हैं। अभी टूर्नामेंट में दो हफ्तों के मुकाबले और उसके बाद प्लेऑफ भी बाकी हैं। इसलिए मई के अंत तक प्रतियोगिता खत्म होने से पहले हमें कुछ और शतक देखने को मिल सकते हैं। यह बल्लेबाजों का उत्सव ज्यादातर मैदानों पर क्यूरेटरों द्वारा तैयार की गई शानदार पिचों की वजह से संभव हुआ है।

घरेलू टीमों की ताकत के अनुसार पिच बनाने का ज्यादा प्रयास नहीं किया गया और इसी कारण छक्कों और चौकों की भरमार देखने को मिली। चौकों की बात समझ में आती है, लेकिन कुछ छक्के ऐसे भी होते हैं जो कैच बन सकते थे, अगर बाउंड्री रोप्स को अंदर लाने की बजाय थोड़ा पीछे रखा जाता। कई मैदान तो वैसे ही छोटे हैं और छोटी बाउंड्री उन्हें और भी छोटा बना देती है।

कांटे की टक्कर वाले मुकाबलों में असली रोमांच

दर्शक बड़े शॉट्स देखने के लिए आते हैं, लेकिन असली रोमांच उस मुकाबले में होता है जो आखिरी ओवर तक कांटे की टक्कर पर टिका रहे, न कि उस मैच में जो 15वें ओवर तक ही खत्म हो जाए और आधी भीड़ नतीजा समझकर बाहर निकलने लगे। जहां पिचों में थोड़ी तेजी और उछाल रही, वहां ज्यादातर बल्लेबाजों की फ्रंट फुट पर खेलने की आदत उजागर हो गई। जब गेंद उनके हेलमेट की तरफ आती है तो वे असहज स्थिति में दिखते हैं और न सिर्फ आउट होते हैं बल्कि बेहद साधारण भी नजर आते हैं।

गेंदबाजों को मिलना चाहिए अतिरिक्त ओवर

विश्व क्रिकेट के तेज गेंदबाजों में शामिल जोफ्रा आर्चर और कगिसो रबाडा ने बल्लेबाजों को उन पिचों पर भी परेशान किया है, जहां विकेटकीपर तक गेंद में ज्यादा उछाल या कैरी नहीं थी। यहीं पर लगता है कि गेंदबाजों के लिए केवल चार ओवर की सीमा पर दोबारा विचार किया जा सकता है। अगर कोई बल्लेबाज पूरे 20 ओवर बल्लेबाजी कर सकता है तो फिर ऐसा गेंदबाज जिसने अपने चार ओवर में तीन विकेट लिए हों, उसे इनाम के तौर पर एक अतिरिक्त ओवर क्यों न दिया जाए?

इससे टीमें केवल रन बचाने की बजाय विकेट लेने की कोशिश करेंगी। आखिर सबसे बेहतरीन डॉट बाल वही होती है जो विकेट दिलाए, है ना? हां, संभव है कि तीन गेंदबाज तीन-तीन विकेट लें और हर एक को एक अतिरिक्त ओवर मिल जाए। इससे उस प्रारूप में संतुलन आएगा जहां लगभग हर चीज बल्लेबाजों के पक्ष में है। छोटी बाउंड्री, बाउंसर को लेकर वाइड की सख्त व्याख्या जैसी कई बातें गेंदबाजों के विरुद्ध जाती हैं। इसलिए गेंदबाजों और फील्डिंग कप्तानों को विकेट लेने के लिए प्रोत्साहन देना और शुरुआत से ही रक्षात्मक रवैया न अपनाने की प्रेरणा देना एक अच्छा प्रयोग हो सकता है।

लोकल लीग्स में आजमाया जा सकता है नियम

हर नए नियम की तरह इसे भी पहले विभिन्न सिटी लीग्स में आजमाया जा सकता है। उसके बाद सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में लागू किया जा सकता है और यदि इससे बल्लेबाजों के अनुकूल इस प्रारूप में संतुलन आता दिखे तो अगले साल के आईपीएल या 2028 से शुरू होने वाले नए आईपीएल चक्र में इसे अपनाया जा सकता है।

कई साल पहले जब मैं आईपीएल गवर्निंग काउंसिल का हिस्सा था, तब मैंने व्यक्तिगत रूप से आठों फ्रेंचाइजी कप्तानों को पत्र लिखकर पूछा था कि आईपीएल को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है। ज्यादातर जवाबों में कोई बड़ा सुझाव नहीं था, लेकिन एडम गिलक्रिस्ट का सुझाव अनोखा था। उन्होंने कहा था कि अंक तालिका में पहले और दूसरे स्थान पर रहने वाली टीमों को क्वालिफायर और एलिमिनेटर के जरिए फाइनल तक पहुंचने का एक अतिरिक्त मौका मिलना चाहिए।