तेहरान, डिजिटल डेस्क : ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने सोमवार को कहा कि सर्वोच्च नेता मोजतबा खमेनेई ने सरकार को अमेरिका के साथ बातचीत करने के लिए कुछ अधिकार दिए हैं, जिसका मकसद मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध को खत्म करना है। सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, पेजेशकियन ने कहा, “हम बातचीत के जरिए इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। इस संबंध में सर्वोच्च नेता ने सरकार को कुछ अधिकार भी दिए हैं।” उनके ये बयान तब आए हैं, जब ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि तेहरान मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के साथ संदेशों का आदान-प्रदान कर रहा है। क्या है ईरान की योजना ? इससे पहले दिन में ईरान ने कहा कि उसके पास होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और वॉशिंगटन के साथ परमाणु वार्ता फिर से शुरू करने के लिए दो दिन की एक योजना है। यह समय-सीमा पहले दिए गए उस प्रस्ताव से कम है, जिसमें सात दिन लगने की उम्मीद थी। यह योजना इस शर्त पर आधारित है कि अमेरिका, तेहरान की मांगों को पूरा करे। ईरान ने कहा है कि फिर से खोले गए जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों को ईरान और ओमान के बीच तय किए गए रास्ते का पालन करना होगा और उन्हें ईरानी निगरानी में ही यात्रा करनी होगी। खबरों के अनुसार, ईरान की अन्य मांगों में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी हटाना, ईरानी तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों को खत्म करना और एक ऐसा संघर्ष-विराम शामिल है, जिसमें लेबनान भी शामिल हो। ‘ईरान के नेक इरादे को दर्शाता प्रस्ताव’ ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि लागू करने की समय-सीमा कम होने के बावजूद यह प्रस्ताव मध्यस्थों के जरिए वॉशिंगटन के साथ बातचीत का आधार बना हुआ है। उन्होंने कहा, “यह एक बार फिर ईरान के नेक इरादों को दर्शाता है।” बघाई ने यह नहीं बताया कि क्या तेहरान ने अपनी मांगों में कोई बदलाव किया है या फिर वॉशिंगटन ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब इस क्षेत्र में फिर से लड़ाई छिड़ने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ईरान के एक शीर्ष राजनयिक ने रविवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका अन्य रास्तों के बजाय कूटनीति का रास्ता चुनेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने सार्वजनिक बयानों में कभी कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दिया है तो कभी ईरान पर भारी बमबारी करने की धमकी दी है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी के अनुसार, यमन में फिर से शुरू हुई लड़ाई के कारण 300,000 से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। विस्थापित परिवारों को रहने की जगह और बुनियादी जरूरत की चीजें जुटाने में संघर्ष करना पड़ रहा है, जबकि सहायता संगठनों को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों और सऊदी समर्थित यमनी सरकार का समर्थन करने वाली सेनाओं के बीच हालिया लड़ाई ने चार साल पुराने संघर्ष-विराम को तोड़ दिया है। इससे मध्य पूर्व के सबसे गरीब देशों में से एक यमन में मानवीय संकट और भी गहरा गया है। इससे पहले चीन ने भी कहा था कि वह नवंबर की शुरुआत से मध्य नवंबर के बीच ईरान, ओमान और सऊदी अरब में एक विशेष दूत भेजेगा ताकि क्षेत्रीय तनाव को कम करने और स्थिरता को बढ़ावा देने में मदद मिल सके इससे पहले चीन ने भी कहा था कि वह नवंबर की शुरुआत से मध्य नवंबर के बीच ईरान, ओमान और सऊदी अरब में एक विशेष दूत भेजेगा ताकि क्षेत्रीय तनाव को कम करने और स्थिरता को बढ़ावा देने में मदद मिल सके। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि यह विशेष दूत क्षेत्र में तनाव कम करने के प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करेगा। यह घोषणा सोमवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल सैद के बीच हुई एक बैठक के बाद की गई। बैठक के विवरण के अनुसार, शी ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र को बड़ी ताकतों की प्रतिद्वंद्विता और भू-राजनीतिक संघर्ष का अखाड़ा नहीं बनना चाहिए। Post navigation सऊदी अरब के हमलों से दहला यमन का हदीदा पोर्ट NSA डोभाल की वियतनाम में उच्चस्तरीय वार्ता, सुरक्षा सहयोग पर बनी सहमति