Nana -patekar

नई दिल्ली,डिजिटल डेस्क: बॉलीवुड और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। 75 साल के एक्टर ने गोवा के डोना पॉला स्थित अपने घर पर थे, जहां सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया।

उन्हें तुरंत पास के मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने लगभग 45 मिनट तक लगातार सीपीआर देकर जान बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने इसकी पुष्टि की है। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल ने इस मामले में मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज किया है और अब पोस्टमार्टम कराया जाएगा।

डॉक्टरों ने शुरुआत में कार्डियक अरेस्ट को मृत्यु का कारण बताया, फिर भी मेडिको-लीगल केस दर्ज करने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या इससे नाना पाटेकर की मौत संदेहास्पद लगती है? जरूरी नहीं कि ऐसा हो।

एमएलसी दर्ज कराना अपने आप में अपराध या संदेहास्पद मौत का प्रमाण नहीं होता है। कई स्थितियों में अस्पताल कानूनी नियमों के अनुसार एमएलसी दर्ज करते हैं ताकि मौत की परिस्थितियों और कारण का आधिकारिक दस्तावेज तैयार किया जा सके।

क्या होता है मेडिको-लीगल केस ?

मेडिको-लीगल केस वह मामला है जिसमें व्यक्ति की बीमारी, चोट या मौत से जुड़े तथ्यों की कानूनी जांच की जरूरत पड़ सकती है। इस केस में डॉक्टर इलाज के साथ जरूरत पड़ने पर पुलिस को सूचित करते हैं। अस्पताल मरीज के इतिहास, पहुंचने की हालत और इलाज संबंधी दस्तावेज रखते हैं। मौत के बाद शव कानूनी तरीके से संरक्षित रखा जाता है और जरूरत पड़ने पर पोस्टमार्टम कराया जाता है।

क्या MLC का मतलब है मौत संदेहपूर्ण है ?

जब किसी मामले को मेडिको-लीगल घोषित किया जाता है, तो इसका यह मतलब कतई नहीं निकलता कि मौत अवश्य ही अप्राकृतिक या शक के घेरे में थी।

असल में इसका मतलब केवल इतना है कि मौत से जुड़े चिकित्सकीय दस्तावेजों को कानूनी ढांचे में दर्ज कर उनकी पुष्टि की जा रही है।

ऐसे मामलों में पुलिस इसलिए जुड़ती है कि मौत के आसपास की परिस्थितियों का दस्तावेजीकरण हो सके और जरूरत पड़ने पर आगे की जांच हो सके।

पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद क्या होता है ?

पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टर शरीर के बाहरी और आंतरिक अंगों की जांच करते हैं। जांच खत्म होने पर रिपोर्ट में मौत के संभावित कारण पर एक्सपर्ट्स की राय दर्ज की जाती है।

नाना पाटेकर की मौत मामले में अभी कार्डियक अरेस्ट को अस्थायी चिकित्सकीय कारण माना गया है, जबकि अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। उनके पुत्र मल्हार पाटेकर ने मृत्यु को प्राकृतिक बताया है।