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नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों की मदद के लिए अमेरिका में रह रहे भारतीय मूल के टेक उद्यमी संदीप नैलवाल ने स्टेबलक्वाइन आधारित दान अभियान शुरू किया है। इस पहल के जरिए दुनिया के किसी भी हिस्से से लोग डिजिटल करेंसी में योगदान दे सकते हैं।

जुटाई गई राशि को स्थानीय मुद्रा में बदलकर नेपाल सरकार के ‘प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष’ में भेजने की योजना है।पालीगन लैब्स के को-फाउंडर नैलवाल ने ‘नेपाल रिलीफ डॉट ओआरजी’ के माध्यम से यह अभियान शुरू किया है।

अभियान के आयोजकों के मुताबिक, रविवार सुबह 9:30 बजे (नेपाल समय) तक करीब 1,73,202 डालर यानी लगभग 2.62 करोड़ नेपाली रुपये जुटाए जा चुके थे। अभियान में पॉलीगन लैब्स के ‘ओपन मनी स्टैक’, क्वाइनमी और क्रास रिवर का सहयोग है।

नैलवाल ने लिंक्डइन पर कहा कि स्टेबलक्वाइन का इस्तेमाल उन परिस्थितियों में उपयोगी हो सकता है

नैलवाल ने लिंक्डइन पर कहा कि स्टेबलक्वाइन का इस्तेमाल उन परिस्थितियों में उपयोगी हो सकता है, जहां राहत राशि को तेजी से जरूरतमंदों तक पहुंचाना हो। उनके मुताबिक, इस पहल को इस तरह तैयार किया गया है कि ब्लॉकचेन तकनीक के जरिए मिलने वाला डिजिटल दान अंततः स्थानीय मुद्रा में बदले और नेपाल सरकार के राहत कोष तक पहुंचे।

स्टेबलक्वाइन क्रिप्टोकरेंसी की ऐसी श्रेणी है जिसकी कीमत किसी अपेक्षाकृत स्थिर परिसंपत्ति, जैसे अमेरिकी डालर, से जोड़ी जाती है। इसका उद्देश्य दूसरी क्रिप्टोकरेंसी की तुलना में कीमत में होने वाले तेज उतार-चढ़ाव को कम करना है।

इस अभियान में अमेरिका स्थित क्रॉस रिवर बैंक भी शामिल है। बैंक ने पहल की पुष्टि करते हुए लोगों से ‘नेपाल रिलीफ डॉट ओआरजी’ के माध्यम से स्टेबलक्वाइन में योगदान देने की अपील की है।

उत्तराखंड के रहने वाले नैलवाल ने नेपाल के साथ भारत के संबंधों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील को भी याद किया, जिसमें उन्होंने नेपाल के लोगों को भारत का ‘भाई-बहन’ बताया था।

अभियान को नेपाल से भी तकनीकी और संपर्क संबंधी मदद मिली है। नेपाली टेक उद्यमी बाल कृष्ण जोशी ने आयोजकों को नेपाली सरकार के साथ समन्वय स्थापित करने में मदद की, ताकि जुटाई गई राशि को आधिकारिक राहत प्रयासों से जोड़ा जा सके।