pakistan-news

इस्लामाबाद, डिजिटल डेस्क : पाकिस्तान के अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में मंगलवार को अज्ञात बंदूकधारियों ने पोलियो टीकाकरण टीम की सुरक्षा में तैनात पुलिस दल पर हमला कर दिया। इस हमले में दो पुलिसकर्मियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हो गया।

जिला पुलिस अधिकारी (डीपीओ) रजा खान के अनुसार, पुलिस का एक दल याख डांड गांव की ओर जा रहा था ताकि वहां पोलियो ड्रॉप पिलाने वाली टीम को सुरक्षा दी जा सके। इसी दौरान मोहमंद जिले की पिंडियाली तहसील में अज्ञात हमलावरों ने पुलिस दल पर घात लगाकर अंधाधुंध गोलियां चला दीं।

घायल जवान और मृतकों के शवों को घलनाई के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर हमलावरों की तलाश शुरू कर दी है।

टांक जिले से चार पोलियो कर्मी अगवा

प्रांत में हुई एक अन्य घटना में, टांक जिले से अज्ञात हथियारबंद लोगों ने मंगलवार को चार पोलियो कार्यकर्ताओं का अपहरण कर लिया। स्थानीय पुलिस अधिकारी अब्दुल समद खान ने बताया कि बंदूकधारियों ने इन कार्यकर्ताओं को बंधक बनाया और किसी अज्ञात स्थान पर ले गए।

सुरक्षा बलों ने अगवा स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षित छुड़ाने के लिए आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान शुरू किया है।

किसने ली हमले की जिम्मेदारी ?

फिलहाल किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, हालांकि पहले प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और उससे जुड़े गुट पोलियो टीमों को निशाना बनाते रहे हैं।

यह हमला 27 जिलों में 48 लाख से अधिक बच्चों को पोलियो रोधी खुराक पिलाने के चार दिवसीय अभियान के पहले दिन हुआ। इस अभियान के लिए 20772 टीमें तैनात की गई हैं, जिनकी सुरक्षा में लगभग 30000 सुरक्षाकर्मी लगे हुए हैं।

लगातार बढ़ रहे हिंसा के मामले

खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर फैसल करीम कुंडी ने दोनों घटनाओं की कड़ी निंदा की और मारे गए जवानों के प्रति दुख जताया। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षित वापसी की अपील की।

1 नवंबर को ही खैबर जिले में पोलियो का एक नया मामला सामने आया था, जिससे इस साल देश में मामलों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है।

दक्षिण एशिया आतंकवाद पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, 2020 से अब तक इस प्रांत में पोलियो टीमों पर कम से कम 47 हमले हो चुके हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, पाकिस्तान और अफगानिस्तान दुनिया के केवल ऐसे दो देश बचे हैं जहां पोलियो का संक्रमण अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।