ब्रसेल्स, डिजिटल डेस्क :आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला पाकिस्तान अल्पसंख्यक समुदायों पर अत्याचारों और उनके दमन के लिए भी बदनाम है। इन समुदायों विशेषकर हिंदुओं और ईसाइयों की बेटियों के अपहरण और जबरन मतांतरण की पोल संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की रिपोर्ट से पहले ही खुल चुकी है। अब यूरोपीय संसद से पारित एक प्रस्ताव में भी वहां धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों की कम उम्र की लड़कियों के अपहरण, जबरन मतांतरण और बाल विवाह की बात उजागर की गई है। इसकी कड़ी निंदा की गई है। यूरोपीय संसद से पारित प्रस्ताव में इस तरह के गलत कृत्यों के व्यापक पैटर्न पर चिंता जताई गई है। प्रस्ताव में खासतौर पर एक 13 वर्षीय मारिया शहबाज नामक पाकिस्तानी ईसाई लड़की का उल्लेख है। गत मार्च में मारिया का अपहरण किया था और उसको इस्लाम धर्म कुबूल कराया गया था। इसके बाद उसकी उस व्यक्ति से जबरन शादी करा दी गई, जिसने उसे अगवा किया था। यूरोपीय संसद के सदस्यों (एमईपी) ने लड़की के कानूनी प्रतिनिधित्व, परिवार की पहुंच और मनोवैज्ञानिक समर्थन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रस्ताव में यूएन आंकड़ों का दिया हवाला 2025 के संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रस्ताव में कहा गया है कि पाकिस्तान में शादी के लिए जबरन मतांतरण से प्रभावित महिलाओं और लड़कियों में लगभग 75 प्रतिशत हिंदू और 25 प्रतिशत ईसाई हैं। यूरोपीय संसद ने कहा, “एमईपी लड़की को कानूनी मदद, उसके परिवार और साइकोलाजिकल सपोर्ट देने की मांग मांग कर रहे हैं। वे धार्मिक अल्पसंख्यकों की नाबालिग लड़कियों के साथ इस तरह के गलत कामों की निंदा करते हैं और इस बात पर जोर देते हैं कि उसका मामला पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों द्वारा झेले जा रहे मानवाधिकार के उल्लंघन का एक उदाहरण है।” जबरन मतांतरण पर रोक लगाने को कहा यूरोपीय संसद ने पाकिस्तान के अधिकारियों से बाल विवाह को खत्म करने और अल्पसंख्यकों की अगवा की गईं और जबरन मतांतरण का शिकार लड़कियों के परिवारों की शिकायतों को संभालने के लिए एक राष्ट्रीय प्रणाली बनाने को कहा है। साथ ही अल्पसंख्यक लड़कियों के अपहरण और जबरन मतांतरण पर रोक लगाने और ऐसे मामलों की निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से जांच कराने की मांग भी की है। Post navigation पाकिस्तान : 170 रुपये किलो बिक रहा आटा, सरकार को ठेंगा दिखा रहे व्यापारी मुंबई-पुणे रेल मार्ग पर भारी भूस्खलन, सभी 30 ट्रेनों की सेवाएं रद