नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से मिलिट्री टकराव शुरू हो गया है। इजरायल और अमेरिका ने मिलकर शनिवार को ईरान पर हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने तेहरान के मिसाइल हथियारों को खत्म करने और उसे न्यूक्लियर हथियार बनाने से रोकने का वादा किया है। इस हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ, रूस, फ्रांस और चीन समेत दुनियाभर से प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं हैं और इसकी निंदा की गई है। आइए जानते हैं किसने क्या कहा? संयुक्त राष्ट्र संघ यूनाइटेड नेशंस के सेक्रेटरी-जनरल एंटोनियो गुटेरेस ने कहा, “मैं मिडिल ईस्ट में आज हुई मिलिट्री बढ़ोतरी की निंदा करता हूं। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का ताकत का इस्तेमाल और उसके बाद पूरे इलाके में ईरान की जवाबी कार्रवाई, इंटरनेशनल शांति और सिक्योरिटी को कमजोर करती है।” रूस रूस की सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी चेयरमैन दिमित्री मेदवेदेव ने कहा, “शांति बनाने वाले ने एक बार फिर अपना असली चेहरा दिखाया है। ईरान के साथ बातचीत एक कवर ऑपरेशन है। किसी को इस पर शक नहीं था। असल में कोई बातचीत करना ही नहीं चाहता था। सवाल यह है कि अपने दुश्मन के शर्मनाक अंत का इंतजार करने के लिए किसके पास ज्यादा सब्र है। यूएसए सिर्फ 249 साल पुराना है। फारसी साम्राज्य 2,500 साल से भी पहले बना था। देखते हैं 100 साल में…” जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन एक संयुक्त बयान में तीनों देशों ने ईरानी हमलों की निंदा करते हुए कहा कि ईरान को बिना सोचे-समझे मिलिट्री हमलों से बचना चाहिए। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर कीर स्टारमर ने एक जॉइंट स्टेटमेंट में कहा, “हम रीजनल स्टेबिलिटी और आम लोगों की जिंदगी की सुरक्षा के लिए अपना कमिटमेंट दोहराते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि वे बातचीत फिर से शुरू करना चाहते हैं। चीन चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “अमेरिका और इजरायल के ईरान पर किए गए मिलिट्री हमलों को लेकर चीन बहुत परेशान है। ईरान की सॉवरेनिटी, सिक्योरिटी और टेरिटोरियल इंटीग्रिटी का सम्मान किया जाना चाहिए। चीन मिलिट्री एक्शन को तुरंत रोकने, तनाव की स्थिति को और न बढ़ाने, बातचीत और नेगोशिएशन फिर से शुरू करने और मिडिल ईस्ट में शांति और स्टेबिलिटी बनाए रखने की कोशिश करने की मांग करता है।” नॉर्वे नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे ने कहा, “इजरायल ने इस हमले को एक प्रिवेंटिव स्ट्राइक बताया है, लेकिन यह इंटरनेशनल कानून के हिसाब से नहीं है। प्रिवेंटिव हमलों के लिए तुरंत खतरा होना जरूरी है।” लेबनान लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा, “मैं फिर से कहता हूं कि हम किसी को भी देश को ऐसे कामों में घसीटने की इजाजत नहीं देंगे जिससे देश की सुरक्षा और एकता को खतरा हो।” Post navigation Israeli हमले में ईरान के रक्षा मंत्री और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कमांडर के मारे जाने की आशंका धार : पुरातात्विक सर्वे में मिलीं गणेश, नरसिंह सहित देवी-देवताओं की 94 मूर्तियां