नई दिल्ली, एंटरटेनमेंट डेस्क : वर्ष 1975 भारतीय सिनेमा के लिए सबसे यादगार पलों में से एक था। 15 अगस्त को रमेश सिप्पी की शोले (Sholay) रिलीज हुई। इसकी कहानी सलीम जावेद ने लिखी है। फिल्म में अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, संजीव कुमार, अमजद खान, हेमा मालिनी और जया बच्चन लीड रोल में नजर आए और मूवी ने इतिहास रच दिया। यह सिनेमाघरों में सबसे लंबे समय तक चलने वाली फिल्म साबित हुई! लेकिन क्या आपको पता है कि इसी दिन एक और फिल्म रिलीज हुई थी जोकि बहुत ही कम बजट की थी और इसने बहुत ही शानदार कमाई की थी। इस फिल्म ने धार्मिक भावना के दम पर लोगों का दिल जीता और इतिहास ही बदल दिया। इसी वर्ष रिलीज हुई थी भक्ति फिल्म ‘शोले’ ने एक्शन, ड्रामा और दोस्ती की कहानी से दर्शकों का दिल जीता, जबकि ‘जय संतोषी मां’ ने भक्ति और आस्था के रंग में दर्शकों को बांध लिया। इस समय जहां मेकर्स बड़ी फिल्मों के साथ क्लैश होने के डर से अपनी फिल्म की रिलीज डेट टाल दिया करते हैं ऐसे में जय संतोषी मां के प्रोड्यूसर सतरम रोहरा को फेल होने का कोई डर नहीं था। मेकर को बेचना पड़ा था अपना घर उस समय बॉलीवुड एक्शन और मसाला फिल्मों की तरफ बढ़ रहा था। कोई भी बड़ा डिस्ट्रीब्यूटर ऐसी धार्मिक फिल्म में इंवेस्ट करने को तैयार नहीं था जिसमें कोई बड़ा स्टार न हो। इस वजह से रोहरा ने अपनी जमीन, पुश्तैनी घर और यहां तक कि पत्नी के गहने भी बेच दिए। उनके पास खाने तक के पैसे नहीं थे। संतोषी मां जब रिलीज हुई तो इसने भारत के ट्रेड एक्सपर्ट्स को भी हैरान कर दिया। ‘जय संतोषी मां’ ने भारत के गांवों और छोटे शहरों में एक ऐसी लहर पैदा की जो किसी भी धार्मिक फिल्म के लिए पहले कभी नहीं देखी गई थी। सतरम रोहरा ने जिस फिल्म के लिए अपना सबकुछ बेच दिया उसके रिलीज होने पर वो करोड़पति बन गए थे। ‘जय संतोषी मां’ ने अपनी लागत से 100 गुना ज्यादा कमाई की। उस जमाने में फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 5 करोड़ रुपये कमाए, जो आज के सैकड़ों करोड़ रुपये के बराबर है। Post navigation दिल्ली-यूपी में शीतलहर का कहर, पहाड़ों पर बर्फबारी ने बढ़ाई ठण्ड T20 World Cup 2026 में ईशान किशन करेंगे ओपनिंग