इस्लामाबाद, रॉयटर्स : पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते से खुद को अलग कर लिया है। आजादी के बाद से अब तक भारत और पाकिस्तान के बीच तीन युद्ध हुए, लेकिन सिंधु जल समझौता लगातार जारी रहा। लेकिन आतंकवाद को पालने-पोसने वाला पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। जब भारत ने खुद को समझौते से अलग कर लिया है, तो पाकिस्तान हमेशा की तरह गीदड़भभकी पर उतर आया है। पाकिस्तान बोला है कि वह भारत के इस कदम को युद्ध के पहल की तरह देखेगा। लेकिन ऐसा नहीं है कि सिर्फ पाकिस्तान की सरकार ही डरी हुई है। पाकिस्तानी लोग भी इस फैसले से सदमे में हैं। पाकिस्तान में पसरा डर न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में बातचीत में पाकिस्तानी किसान होमला ठाकुर ने अपनी फसलों के भविष्य को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नदी का जलस्तर काफी कम हो गया है। सब्जियां सूख रही हैं। किसान ने कहा कि अगर भारत पानी रोक देगा, तो पूरा देश थार रेगिस्तान में बदल जाएगा। हम भूख से मर जाएंगे। पाकिस्तानी सरकार के रिएक्शन पर यू.के. कंसल्टिंग फर्म ऑक्सफोर्ड पॉलिसी मैनेजमेंट के अर्थशास्त्री और टीम लीडर वकार अहमद ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत के संधि से अलग होने के खतरे को कम करके आंका है। पानी रोकने पर काम कर रहा भारतबता दें कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा है कि हम सुनिश्चित करेंगे कि सिंधु नदी का एक भी बूंद पानी पाकिस्तान तक न पहुंचे। नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि कुछ ही महीनों में नहरों का उपयोग करके भारत अपने खेतों की तरफ पानी को मोड़ देगा। हालांकि जलविद्युत बांधों की परियोजना को पूर्ण करने में 4 से 7 वर्ष लगेंगे। पाकिस्तान का पानी रोकने का असर सिर्फ खेती पर ही नहीं पड़ेगी। बल्कि पानी की कमी से बिजली उत्पादन भी प्रभावित होगा और अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा झटका लगेगा। कराची शोध फर्म पाकिस्तान एग्रीकल्चर रिसर्च के गशारिब शौकत ने कहा इस वक्त हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। Post navigation DC vs RCB Playing 11: अक्षर पटेल इस खिलाड़ी को करेंगे बाहर हिफाजत-ए-इस्लाम बोला- यूनुस का भी शेख हसीना जैसा करेंगे हाल