लाहौर, डिजिटल डेस्क : सऊदी अरब और तुर्किए के साथ त्रिपक्षीय मक्का संयुक्त रक्षा समझौते में शामिल होने के बाद पाकिस्तान अब इसके उद्देश्यों को लेकर उठ रहे सवालों पर सफाई दे रहा है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा है कि समझौता पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति का है और इसका उद्देश्य किसी देश को निशाना बनाना नहीं है। उन्होंने कहा कि यह समझौता क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किया गया है। दरअसल, पाकिस्तान की छवि को देखते हुए इस समझौते में उसके शामिल होने को लेकर दुनियाभर में आशंकाएं उठ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान न केवल भारत और अफगानिस्तान में आतंकियों को बढ़ावा देने में आगे रहता है, बल्कि वह इजरायल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता। इसके अलावा इस्लामी देशों में पाकिस्तान एकमात्र परमाणु शक्ति भी है। इस तरह, वह अन्य इस्लामी देशों को प्रभावित करके इसमें शामिल करा सकता है। ऐसे में ये समझौता क्षेत्र में अस्थिरता का सबब भी बन सकता है। इशाक डार ने क्या कहा ? इशाक डार ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि मक्का समझौता तीनों देशों के बीच वर्षों से चले आ रहे संवाद और सहयोग का परिणाम है। इसका मकसद शांति और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि समझौता तीनों देशों के बीच पहले से मौजूद किसी भी द्विपक्षीय या बहुपक्षीय समझौते को समाप्त नहीं करता और न ही उसकी जगह लेता है। समझौते की सबसे अहम शर्त यह है कि तीनों देशों में से किसी एक पर बाहरी सशस्त्र हमला होने पर उसे अन्य दोनों देशों पर भी हमला माना जाएगा। डार ने कहा कि यह प्रविधान संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत व्यक्तिगत और सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार के अनुरूप है। उन्होंने यह भी कहा कि समझौता क्षेत्र के उन सभी देशों के लिए खुला है जो इसके मूल सिद्धांतों को स्वीकार करते हों और आपसी सम्मान, सहयोग तथा शांतिपूर्ण तरीकों से मतभेदों को सुलझाने के लिए तैयार हों। तुर्किए बोला- ईरान पर हमले के लिए नहीं है मक्का समझौता तुर्किए के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा है कि मक्का रक्षा समझौता ईरान से मुकाबला करने के लिए नहीं है। ईरान समर्थित हाउती विद्रोहियों के सऊदी अरब पर हमलों के परिप्रेक्ष्य में उन्होंने कहा कि सऊदी अरब पर ईरान के हमलों में सऊदी का कोई दोष नहीं है। इन हमलों के लिए अमेरिका और इजरायल जिम्मेदार हैं। हाउती जैसे मामलों को सुलझाने के लिए सऊदी अरब पिछले दो साल से ईरान से बात कर रहा है। सऊदी अरब की ऐसी कोई मंशा नहीं है कि वह ईरान पर हमला करे या ईरान को खत्म कर दे। बल्कि, वह होर्मुज स्ट्रेट के आसपास चल रही हिंसा को खत्म करना चाहता है। यहां तक कि दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे में शामिल होने के लिए सऊदी अरब का प्रतिनिधिमंडल तेहरान गया था। Post navigation दक्षिण कोरिया में लगाए गए 10 अरब से ज्यादा पेड़, बंजर पहाड़ बने हरे-भरे जंगल MP : डेढ़ वर्षीय धृति शुक्ला ने योग में बनाया विश्व कीर्तिमान, बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराया नाम