आगरा ,संवाददाता :आईसीआईसीआई बैंक से 1.06 करोड़ रुपये की ऋण धनराशि के मामले में भाजपा ओबीसी मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य मिश्रीलाल राजपूत फंस गए हैं। मामले में थाना हरीपर्वत में प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन पर आरोप है कि दो लोगों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज की मदद से बैंक से ऋण लिया गया। किस्त बंद होने पर जांच में पूरा मामला सामने आ गया। पुलिस का कहना है कि मामला ऋण से संबंधित होने के कारण साक्ष्य संकलन के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। आईसीआईसीआई बैंक के अधिकृत प्रतिनिधि हर्ष गोयल ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि फर्रुखाबाद के कैमगंज निवासी प्रियंका और अंकुश श्रीवास्तव ने 9 फरवरी 2021 को मौजा कलाल खेरिया में एक संपत्ति के एवज में 78 लाख रुपये का गृह ऋण लिया। 4 अक्तूबर, 2021 को टॉपअप के रूप में 15 लाख रुपये का ऋण लिया। 31 जनवरी 2024 के बाद किस्त जमा नहीं होने पर दोनों से संपर्क की कोशिश की मगर दोनों के मोबाइल बंद थे। वह लोग दर्ज कराए पते पर भी नहीं मिले। इस पर बैंक ने सरफेसी एक्ट के तहत कब्जा लेने की कोशिश की। यह संपत्ति कलाल खेरिया निवासी मिश्रीलाल की निकली। यह इंडियन बैंक में 2015 से गिरवी थी। आरोप लगाया गया कि मिश्रीलाल ने आधी संपत्ति के कागजात बनवाकर प्रियंका और अंकुश को बेच दिया आरोप लगाया गया कि मिश्रीलाल ने आधी संपत्ति के कागजात बनवाकर प्रियंका और अंकुश को बेच दिया। इस पर ऋण लिया। पूछताछ में मिश्रीलाल ने बताया कि उन्होंने कोई संपत्ति नहीं बेची है, जबकि कोटक महिंद्रा बैंक से ऋण के रूप में खाते में आई धनराशि के बारे में कोई जवाब नहीं दे सके। इस तरह बैंक को गुमराह कर ऋण लिया गया। फर्जी कागजात भी तैयार किए गए। वर्तमान में ऋण 1.06 करोड़ का है। मामले में डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि ऋण के कागजात देखे जाएंगे। मिश्रीलाल पर आरोप लगाया है। उन्हें भी पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। अगर किसी तरह के फर्जीवाड़े की बात सामने आएगी तो कार्रवाई की जाएगी। बैंक ने बिना जांच के कैसे कर दिया ऋणभाजपा नेता मिश्रीलाल के बेटे उदयराम ने बताया कि बैंक ने पिता पर गलत आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है। जिस संपत्ति पर ऋण लेने की बात कही जा रही है, उस पर पहले से ही ऋण चल रहा था। अगर बैंक के कर्मचारियों ने ठीक से जांच की होती तो इस बात की जानकारी मिल सकती थी। जिन प्रियंका और अंकुश ने ऋण लिया, बैंक कर्मचारियों ने उनसे मिलीभगत कर ऋण दिया। सवाल है कि किस्त जमा होने पर ही जांच क्यों नहीं की गई। मामले में वह सभी साक्ष्य पुलिस को उपलब्ध कराएंगे। Post navigation UP : 30 हजार रिश्वत लेते लेखपाल गिरफ्तार UP : बछड़े का वध करने वाले हत्यारे का एनकाउंटर