कानपुर, संवाददाता : Kanpur News: कानपुर पुलिस ने किडनी कांड के आरोपी परवेज सैफी को 10 लाख रुपये नकद के साथ गिरफ्तार किया है, जो डॉक्टरों की टीम को गाड़ियां मुहैया कराता था। जांच में सामने आया है कि ट्रांसप्लांट की जटिल सर्जरी में लखनऊ के एक बड़े विशेषज्ञ सर्जन का हाथ हो सकता है, जिसके साक्ष्य पुलिस को मिले हैं।
कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट मामले में डॉ. अफजल, डॉ. रोहित के साथी परवेज सैफी को मंगलवार देर रात पुलिस ने रावतपुर क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से 10 लाख रुपये बरामद हुए हैं। पुलिस ने उसके एक और साथी को भी हिरासत में लिया है। डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक, परवेज सैफी डॉ. अफजल, डॉ. रोहित और एनसीआर के अन्य स्टाफ को कानपुर लाने का कार्य करता था। वह टीम को कार मुहैया करवाता था।
उसके बारे में जेल गए कुलदीप और राजेश कुमार ने भी जानकारी दी थी। इससे पहले जेल गए शिवम अग्रवाल के मोबाइल से पुलिस को डॉ. अफजल और परवेज का वीडियो मिला था, जिसमें दोनों 500-500 की गड्डियों पर लेटे हुए नजर आ रहे थे। ये रुपये किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाली मुजफ्फरनगर की पारुल द्वारा दिए गए थे। डॉ. अफजल ने 22 लाख रुपये लिए थे, इसमें से 10 लाख परवेज ने लिए थे। डीसीपी ने बताया कि परवेज अधिवक्ताओं के साथ सरेंडर करने की तैयारी में था, लेकिन उसको सर्विलांस से दबोच लिया गया।
किडनी ट्रांसप्लांट में लखनऊ के बड़े सर्जन का मिला कनेक्शन
किडनी ट्रांसप्लांट में लखनऊ के बड़े सर्जन का भी जांच टीम को कनेक्शन मिला है। वह किडनी ट्रांसप्लांट का विशेषज्ञ होने के साथ ही बड़े अस्पताल से जुड़ा है। पुलिस को उसकी डॉ. रोहित के साथ जान पहचान होने के कुछ साक्ष्य मिले हैं, जिससे उन पर शक की सुई घूम रही है। पुलिस सर्जन से पूछताछ कर सकती है। शहर में हुए किडनी ट्रांसप्लांट में पुलिस को आधे से अधिक आरोपियों के नाम मिल गए हैं।
टीमों को और साक्ष्य जुटाने के लिए कहा गया
विशेषज्ञों ने उन्हें बताया है कि यह सर्जरी किसी जानकार ने की है ट्रांसप्लांट ठीक हुआ है। किसी तरह का संक्रमण नहीं मिला है। किडनी ट्रांसप्लांट में लगभग आठ घंटे का समय लगता है। पहले डोनर का ऑपरेशन एक से दो घंटे में होता है। उसकी किडनी सुरक्षित की जाती है। इसके बाद गुर्दा रोगी को किडनी लगाने की प्रक्रिया होती है। इसमें छह घंटे से अधिक समय लगता है। इतनी लंबी सर्जरी ओटी मैनेजर या ओटी असिस्टेंट के बस की बात नहीं है।
लखनऊ पुलिस का ले रहे सहयोग
पुलिस को लखनऊ के विशेषज्ञ के बारे में कुछ साक्ष्य मिले हैं। टीमों को और साक्ष्य जुटाने के लिए कहा गया है। डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम के मुताबिक रविवार की रात लगभग तीन बजे आहूजा हॉस्पिटल से दो कारें निकली थीं। किया कैरेंस कार गाजियाबाद के वैशाली गई जिसमें मुदस्सर अली सिद्दीकी, कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार सवार थे। दूसरी अर्टिगा कार लखनऊ के ट्रांसपोर्टनगर तक गई। उसमें पांच लोग सवार थे।
किडनी ट्रांसप्लांट मामले में लखनऊ और दिल्ली के बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों का नाम सामने आया है। उनकी डॉ. रोहित से जान पहचान है। पुलिस की टीमें और साक्ष्य जुटा रही हैं। जल्द ही उनसे पूछताछ की जाएगी। -एसएम कासिम आबिदी, डीसीपी पश्चिम, कानपुर
