चंपावत, संवाददाता : नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश की एक सड़क 11 वर्षों से कागजों में ही घूम रही है। अभी तक सड़क की कटिंग शुरू नहीं हो सकी है। इसके चलते 17 तोकों के एक हजार से अधिक लोग पिछड़ेपन और सुविधाओं के अभाव में गुजर-बसर कर रहे हैं।
तल्लादेश के बकोड़ा और आसपास के गांवों के लोगों के लिए सड़क की कमी विकास ही नहीं, जेब पर भी भारी पड़ रही है। सड़क नहीं होने से ग्रामीणों को सामान के ढुलान में काफी खर्च करना पड़ रहा है। 12 किमी लंबी मंच-बकोड़ा सड़क वर्ष 2012 में मंजूर हुई थी लेकिन कटिंग आज तक शुरू नहीं हो सकी है।
कम आबादी वाले इन गांवों के लिए सड़क बनने में हो रही देरी की वजह घना जंगल है। सड़क विहीन इन गांवों के लिए घोड़ा और खच्चर ढुलान का एकमात्र सहारा है लेकिन इसके लिए 500 रुपये प्रति क्विंटल भाड़ा देना पड़ता है। भाड़े से भवन सामग्री की लागत 60 प्रतिशत अधिक हो जाती है। सामान ही नहीं, बुजुर्गों और बीमार लोगों को डोली से मंच तक लाने में तीन से चार घंटे लगते हैं।
