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इटावा,संवाददाता :Etawah News: एक किशोर को हिरासत में लेकर कथित रूप से मारपीट करने, जातिसूचक टिप्पणी करने और छोड़ने के बदले रुपये मांगने के आरोप में तत्कालीन आईटीआई चौकी प्रभारी दारोगा अरुण सिंह और दो सिपाहियों के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है।

चोरी का झूठा आरोप लगाकर एक 16 वर्षीय दलित किशोर को अवैध हिरासत में रखने, उसकी बेरहमी से पिटाई करने, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित करने और उसे छोड़ने के बदले रिश्वत मांगने के मामले में कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत के सख्त आदेश के बाद आईटीआई पुलिस चौकी के तत्कालीन प्रभारी दारोगा अरुण सिंह और उनके साथ तैनात रहे दो सिपाहियों के खिलाफ फ्रेंड्स कॉलोनी थाने में गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। इस कार्रवाई के बाद से महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

किशोर को रास्ते से उठाया, चौकी में ढाया सितम

घटनाक्रम के अनुसार, फ्रेंड्स कॉलोनी थाना क्षेत्र के एक मोहल्ले के रहने वाले पीड़ित पिता ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने कोर्ट में दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि उनका 16 वर्षीय नाबालिग बेटा घर का खर्च चलाने के लिए मजदूरी के साथ-साथ कबाड़ बीनने का काम करता है।

आरोप है कि बीते 15 मई की सुबह करीब 10 बजे किशोर रोजाना की तरह काम के सिलसिले में आईटीआई चौराहे के पास से गुजर रहा था। इसी दौरान तत्कालीन आईटीआई चौकी प्रभारी दारोगा अरुण सिंह अपने दो हमराह सिपाहियों के साथ वहां पहुंचे।

पुलिसकर्मियों ने किशोर को रोका और उस पर चोरी करने का झूठा आरोप लगाते हुए जबरन पकड़ लिया। जब किशोर ने इसका विरोध किया, तो पुलिसकर्मियों ने उसे बीच सड़क पर ही पीटना शुरू कर दिया और घसीटते हुए आईटीआई चौकी ले गए। परिजनों का आरोप है कि चौकी के भीतर भी किशोर के साथ बेरहमी से मारपीट की गई और उसे यह तक नहीं बताया गया कि उसका कसूर क्या है।

गिड़गिड़ाते माता-पिता से मांगी घूस

पीड़ित पिता ने बताया कि जब बेटे को पुलिस द्वारा उठाए जाने की जानकारी उन्हें मिली, तो वे बदहवास हालत में आईटीआई पुलिस चौकी पहुंचे। वहां जब उन्होंने अपने नाबालिग बेटे को छोड़ने की गुहार लगाई, तो आरोपी पुलिसकर्मी भड़क गए।

आरोप है कि दारोगा और सिपाहियों ने उनके साथ गाली-गलौज की और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए उन्हें अपमानित किया। इसके बाद वे किशोर को फ्रेंड्स कॉलोनी थाने ले गए। थाने में तत्कालीन चौकी प्रभारी ने धमकी दी कि अगर अपने बेटे को बचाना चाहते हो और जेल जाने से रोकना चाहते हो, तो तुरंत 5,000 रुपये की व्यवस्था करो।

गरीब माता-पिता के पास पैसे न होने के कारण वे असमर्थता जताते हुए गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन पुलिस का दिल नहीं पसीजा। किशोर को पूरी रात थाने की हवालात में प्रताड़ित किया गया और अगले दिन 16 मई को केस दर्ज करने की धमकी देकर छोड़ा गया।

एसएसपी के एक्शन न लेने पर कोर्ट नाराज 

थाने से छूटने के बाद डरा-सहमा किशोर जब घर पहुंचा, तो परिजनों ने उसी दिन 16 मई उसका जिला अस्पताल में मेडिकल कराया। सरकारी डॉक्टरों द्वारा तैयार की गई मेडिकल रिपोर्ट ने पुलिस के दावों की हवा निकाल दी; रिपोर्ट में किशोर के शरीर पर गंभीर चोटों के 6 निशान पाए गए।

पीड़ित परिवार ने 25 मई को जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से भी मुलाकात कर लिखित शिकायत दर्ज कराई और न्याय की गुहार लगाई, लेकिन जब पुलिस अधिकारियों के स्तर से कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो लाचार पिता ने न्यायालय की शरण ली।

एसएसपी इटावा बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि माननीय न्यायालय से मिले आदेश के अनुपालन में फ्रेंड्स कॉलोनी थाने के तत्कालीन चौकी प्रभारी दारोगा अरुण सिंह और घटना में शामिल दो सिपाहियों के खिलाफ गंभीर धाराओं और एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। इस पूरे संवेदनशील मामले की निष्पक्ष विवेचना की जा रही है। जांच के दौरान जो भी नए तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।