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नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क :अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी। पिछले 11 वर्षों में यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त एक वार्षिक आयोजन से आगे बढ़कर दुनिया के सबसे बड़े सहभागी आरोग्य आंदोलनों में शामिल हो गया है। योग के माध्यम से विभिन्न देशों, संस्कृतियों और समुदायों के लाखों लोग एक साझा मंच पर जुड़ रहे हैं। वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ रखी गई है, जो निवारक स्वास्थ्य देखभाल, सक्रिय जीवनशैली और दीर्घकालिक आरोग्य को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

सभ्यता की विरासत से वैश्विक पहचान तक

योग विश्व की सबसे प्राचीन ज्ञान परंपराओं में से एक है, जिसकी जड़ें सिंधु-सरस्वती सभ्यता तक पहुंचती हैं। संस्कृत शब्द ‘योग’ का अर्थ जोड़ना या एकताबद्ध करना है, जो शरीर, मन और आत्मा के समन्वय का प्रतीक माना जाता है। वेदों, उपनिषदों, बौद्ध और जैन परंपराओं के साथ-साथ रामायण और महाभारत में भी योग का उल्लेख मिलता है। महर्षि पतंजलि ने योग सूत्रों के माध्यम से योग की दार्शनिक और व्यावहारिक संरचना को व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया। सदियों से ऋषियों और योगाचार्यों ने इस ज्ञान परंपरा को संरक्षित और समृद्ध करते हुए विश्वभर में इसका प्रसार किया है। भारत की इस प्राचीन विरासत ने समय के साथ एक वैश्विक आरोग्य आंदोलन का रूप ले लिया है।

संयुक्त राष्ट्र की मान्यता और भारत की पहल

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था। इस संबंध में प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र में रखा था, जिसे 175 सदस्य देशों का समर्थन मिला। पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया। इसके बाद वर्ष 2016 में यूनेस्को ने योग को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया। इस मान्यता ने वैश्विक आरोग्य के क्षेत्र में भारत के योगदान को नई पहचान दिलाई और योग को विश्वव्यापी जनआंदोलन के रूप में स्थापित किया।

देशभर में फैला योग दिवस का आयोजन

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस देशभर में हजारों कार्यक्रमों के माध्यम से मनाया जाता है, जबकि मुख्य राष्ट्रीय आयोजन हर वर्ष अलग-अलग शहरों में आयोजित किया जाता है। इसकी शुरुआत नई दिल्ली के राजपथ से हुई थी। इसके बाद चंडीगढ़, लखनऊ, देहरादून, रांची, मैसूरु, जबलपुर, श्रीनगर और विशाखापत्तनम जैसे शहर मेजबान बन चुके हैं। 11 आयोजनों के दौरान योग दिवस एक वैश्विक कार्यक्रम से बदलकर निवारक स्वास्थ्य, स्वस्थ जीवनशैली और मानसिक संतुलन के जनआंदोलन के रूप में विकसित हुआ है। वर्तमान में इसे 190 से अधिक देशों में मनाया जाता है।

कॉमन योग प्रोटोकॉल बना वैश्विक आधार

दुनिया भर में एक समान और समन्वित तरीके से योग दिवस मनाने के लिए आयुष मंत्रालय ने 2015 में प्रमुख योग संस्थानों और विशेषज्ञों के सहयोग से कॉमन योग प्रोटोकॉल (सीवाईपी) तैयार किया था। यह 45 मिनट का मानकीकृत योग अभ्यास कार्यक्रम है, जिसमें शरीर को तैयार करने वाले अभ्यास, योगासन, कपालभाति, प्राणायाम, ध्यान और विश्राम तकनीकें शामिल हैं। इसे इस प्रकार तैयार किया गया है कि विभिन्न आयु वर्ग और पृष्ठभूमि के लोग आसानी से इसका अभ्यास कर सकें। वर्ष 2026 में संस्थानों को आवश्यकता के अनुसार प्राणायाम, योग निद्रा, ध्यान और सत्संग जैसी गतिविधियों के लिए अतिरिक्त 15 मिनट जोड़ने की अनुमति भी दी गई है।

कोलकाता में होगा 12वें योग दिवस का मुख्य आयोजन

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का 12वां संस्करण 21 जून 2026 को मनाया जा रहा है और इस बार मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम की मेजबानी कोलकाता कर रहा है। इस वर्ष की थीम ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ है, जो बढ़ती उम्र के साथ बेहतर स्वास्थ्य, सक्रिय जीवन और समग्र कल्याण पर बल देती है। दुनिया भर में बढ़ती बुजुर्ग आबादी और गैर-संचारी रोगों की चुनौतियों के बीच यह थीम केवल जीवन की अवधि बढ़ाने के बजाय स्वस्थ जीवन अवधि बढ़ाने के महत्व को रेखांकित करती है।

स्वस्थ आयु की आधारशिला के रूप में योग

विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ आयु का अर्थ केवल लंबा जीवन नहीं, बल्कि जीवन भर कार्य करने की क्षमता, गतिशीलता, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक सहभागिता बनाए रखना है। योग इस दिशा में एक समग्र अभ्यास के रूप में उभरता है, जो शारीरिक गतिविधि, श्वास नियंत्रण और मानसिक एकाग्रता को एक साथ जोड़ता है। ताड़ासन और त्रिकोणासन जैसे आसन शरीर की मुद्रा और लचीलेपन को बेहतर बनाते हैं, जबकि भुजंगासन और मकरासन रीढ़ की मजबूती और विश्राम में सहायक हैं। अनुलोम-विलोम और भ्रामरी जैसे प्राणायाम मानसिक शांति और श्वसन जागरूकता बढ़ाते हैं। ध्यान मानसिक संतुलन और एकाग्रता को मजबूत करता है।

100 दिन के काउंटडाउन से शुरू हुई तैयारियां

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की तैयारियां काफी पहले शुरू हो गई थीं। 13 मार्च 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन से 100 दिवसीय काउंटडाउन कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके बाद महाराष्ट्र के लोनार में 75 दिवसीय और हैदराबाद के कान्हा शांति वनम में 50 दिवसीय काउंटडाउन कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों में हजारों लोगों ने सामूहिक रूप से कॉमन योग प्रोटोकॉल का अभ्यास किया। 14 जून को आयोजित विशेष राष्ट्रव्यापी लाइव योग सत्र में चार लाख से अधिक लोगों की भागीदारी के साथ नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बना।

विरासत स्थलों से जुड़ा योग

योग दिवस की तैयारियों को देश की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत से भी जोड़ा गया। खजुराहो समूह के स्मारकों में आयोजित 25 दिवसीय काउंटडाउन कार्यक्रम ने योग और विरासत संरक्षण के संदेश को एक साथ प्रस्तुत किया। इसके साथ ही ‘100 दिन, 100 शहर, 100 संगठन’ अभियान भी शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य संस्थानों और समुदायों को योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित करना है।

योग 365: एक दिन नहीं, सालभर का अभियान

वर्ष 2026 में योग दिवस का फोकस केवल 21 जून तक सीमित नहीं रखा गया है। ‘योग 365’ पहल के माध्यम से लोगों को पूरे वर्ष योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस पहल को जन-जागरूकता अभियानों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और संस्थागत सहयोग का समर्थन प्राप्त है। इसका उद्देश्य योग को घर, स्कूल, कार्यस्थल और समुदाय स्तर तक पहुंचाना है।

नई पहलें और विशेष प्रोटोकॉल

आयुष मंत्रालय ने इस वर्ष कई नई पहलें शुरू की हैं। इनमें ‘योग फॉर एयर ट्रैवल’ विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जिसे मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान ने लंबी हवाई यात्राओं के दौरान स्वास्थ्य और आराम को ध्यान में रखते हुए विकसित किया है। इसके अलावा गैर-संचारी रोगों के लिए 10 विशेष योग प्रोटोकॉल भी विकसित किए गए हैं। इनमें मधुमेह, उच्च रक्तचाप, अस्थमा और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए विशेष मॉड्यूल शामिल हैं। बच्चों, किशोरों, बुजुर्गों, महिलाओं, गर्भवती महिलाओं और नशामुक्ति प्रक्रिया से गुजर रहे लोगों के लिए भी अलग-अलग योग मॉड्यूल तैयार किए गए हैं।