अब्बास अंसारी की विधान सभा सदस्यता बहाल न की जाए- अशोक पाण्डे

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लखनऊ, डॉ. ए.के. सेठ : सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक पांडे ने अब्बास अंसारी की विधानसभा सदस्यता बहाल न करने का विधानसभा स्पीकर को एक पत्र सौंप कर अनुरोध किया है। इस पत्र में एडवोकेट अशोक पाण्डे ने कानून का विस्तृत हवाला देते हुए कहा है कि 2 वर्ष की सजा होने के कारण, सजा की तिथि, से अपनी विधानसभा सदस्यता गंवा चुके अब्बास अंसारी की सदस्यता इस आधार पर बहाल न किया जाए कि उच्च न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय द्वारा SLP Criminal 8644 of 2023 में राहुल गांधी की याचिका पर पारित आदेश का हवाला देकर उनका conviction stay कर दिया है।

इस कानून के आधार पर अब तक लगभग चालीस लोग अपनी सदस्यता गवा चुके हैं

संबिधान का अनुच्छेद 102 (सांसदों के संबंध में) और 191 (विधायकों के संबंध में) सपठित धारा 8 (3) जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 यह प्रावधान करता है कि कोई भी सांसद या विधायक, अगर उसे किसी आपराधिक मामले में दो वर्ष या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है, वह सजा की तिथि से सांसद या विधायक बने रहने या सांसद या विधायक चुने जाने के अयोग्य होगा। उपरोक्त वर्णित प्राविधान नीचे quote किया जा रहा है।

इस कानून के आधार पर भारत के संसदीय इतिहास में अब तक लगभग चालीस लोग अपनी सदस्यता गवा चुके हैं और सदस्यता जाने के बाद किसी की भी सदस्यता बहाल नहीं हुई। सन् 2023 में लोकसभा सचिवालय ने एक संवैधानिक अपराध किया जब उसने पुड्डुचेरी के सांसद मोहम्मद फैसल खान की सदस्यता इस आधार पर बहाल कर दिया कि केरल हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगा दिया है। बाद में राहुल गांधी के मामले में भी ऐसा ही किया गया जब सुप्रीम कोर्ट ‌द्वारा conviction stay करने के कारण लोक सभा सचिवालय ने राहुल गांधी की सदस्यता बहाल कर दिया। यह कृत्य भारत के ससदीय इतिहास में पहली बार हुआ है।

सजा पर रोक लगाने का आदेश जयललिता के मामले का खुला उलंघन है

उस मामले में पांच जजों की संविधान पीठ ने यह व्यवस्था दिया कि अगर किसी सांसद या विधायक की सदस्यता इस आधार पर जाती है कि उसे किसी आपराधिक मामले में दो वर्ष या उससे अधिक की सजा हुई है तो वह व्यक्ति सांसद या विधायक बने रहने या फिर चुने जाने के लिए तब तक अयोग्य होगा जब तक कि ऊपरी अदालत उस सजा को रद्द न कर दे। सुप्रीम कोर्ट द्वारा उपरोक्त मामले में दी व्यवस्था का पैराग्राफ 40 आपके विचार के लिए नीचे वर्णित है

Para 40- If the appeal of accused succeeds the conviction is wiped out as cleanly as if it had never existed and the sentence is set aside. A successful appeal means that the stigma of offence that the stigma of offence is altogether erased. But that is not to say that the presumption of innocence continues after the conviction by the trial court. That conviction and sentence it carries operate against the accused in all their rigour until set aside in appeal, and a disqualification that attached to the conviction and sentence applies as well.”

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि मोहम्मद फैसल खान व राहुल गांधी के मामले में सजा पर रोक लगाकर करके न्यायालय ने अपनी अधिकारिता का उलंघन किया और उस conviction stay के आधार इन दोनों मामलों में सांसदों की खोई हुई सदस्यता को बहाल करके लोकसभा सचिवालय ने एक गम्भीर संबैधानिक अपराध किया है।

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