नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : बिहार में कांग्रे की राजनीतिक जमीन एक बार फिर हिल गई है। विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने विपक्षी महागठबंधन के सारे सपनों को चूर-चूर कर दिया है। खासकर कांग्रेस के लिए यह चुनाव आजादी के बाद का सबसे काला दौर साबित हुआ है। जहां एक ओर NDA ने शानदार वापसी की है, वहीं महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टनर कांग्रेस को ऐसा झटका लगा है कि पार्टी के नेता सदमे में हैं।
60 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस महज 2 सीट पर आगे है, बाकी 58 पर हार की तलवार लटक रही है। कांग्रेस ने महागठबंधन के रूप में RJD और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन परिणामों ने साफ बता दिया कि जनता ने विपक्ष के ‘परिवर्तन’ के नारे को ठुकरा दिया है। कांग्रेस का प्रदर्शन तो वाकई में शर्मनाक रहा।
इन दो सीटों पर कांग्रेस आगे
महागठबंधन में कांग्रेस ने 60 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन अब महज दो सीटों किशनगंज और मनिहारी में कांग्रेस प्रत्याशी आगे चल रहे हैं, बाकी 58 सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी हार रहे हैं। किशनगंज M.D कमरुल होदा और मनिहारी से मनोहर प्रसाद सिंह ने कांग्रेस की लाज बचाई हुई है।
कांग्रेस का बिहार में सूर्यास्त ?
बिहार में कांग्रेस का इतिहास कभी गौरवशाली रहा है। 1937 से लेकर 1990 तक पार्टी यहां की सत्ता की धुरी रही, लेकिन 1990 में लालू प्रसाद यादव के सीएम बनने के बाद से लगातार गिरावट आती गई। कांग्रेस को 2010 में 04, 2015 में 27, 2020 में 19 और अब 2025 में संभावित 2 सीट मिलती नजर आर रही हैं। यह आंकड़े कांग्रेस के लिए चेतावनी की घंटी हैं।
महागठबंधन ने इस बार यादव-मुस्लिम फॉर्मूले पर दांव लगाया, लेकिन वोटरों को NDA ने अपने पाले में कर लिया। चुनाव परिणामों ने न सिर्फ कांग्रेस, बल्कि पूरे विपक्ष को सोचने पर मजबूर कर दिया है। एनडीए की अगुवाई में नीतीश कुमार और BJP की जोड़ी फिर सत्ता की कुर्सी पर विराजमान होने को तैयार है।
