नई दिल्ली, न्यूज़ डेस्क : Donald Trump peace Plan : व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप पहले दिन से ही स्पष्ट रहे हैं कि वह रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं, और वे दोनों पक्षों द्वारा शांति समझौते के लिए प्रतिबद्धता से इनकार करने से निराश हैं।
अमेरिकी प्रसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर से यूक्रेन में शांति को लेकर कुछ बड़ी तैयारी करते हुए नजर आ रहे हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का ट्रंप प्रशासन यूक्रेन शांति प्रस्ताव पर चर्चा कर रहा है। बता दें कि इससे पहले रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने और दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिए ट्रंप ने अलास्का में रूसी प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन और उसके बाद वाशिंगटन में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की थी।
वहीं, अब फिर से वे शांति की तैयारी कर रहे हैं। इस प्रस्ताव में यूक्रेन के कीव द्वारा पूर्वी डोनबास क्षेत्र को सौंपना और अमेरिका समर्थित सुरक्षा गारंटी के बदले में अपनी सैन्य क्षमताओं को सीमित करने पर सहमति बनाना शामिल है। यहां बता दें कि ट्रंप पहले ही आठ युद्ध को रुकवाने का दावा कर चुके हैं। उनका मानना रहा है कि वे दुनिया में इन युद्धों को रुकवाये हैं तो वे शांति का नोबेल पुरस्कार पाने के हकदार हैं। लेकिन इस बार जब इस पुरस्कार की घोषणा की जा रही थी तब उनका नाम नहीं आया था। इससे वे दुखी भी हुए थे। लेकिन ट्रंप एक बार फिर से युद्ध को रुकवाने की अपनी रणनीति पर चलते हुए दिख रहे हैं। सवाल यह है कि क्या ट्रंप अब 9वां युद्ध रुकवाने का दावा कर नोबेल पुरस्कार पाना चाहते हैं ?
रूस और यूक्रेन दोनों की ओर से समझौता करने की आवश्यकता
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के भीतर यूक्रेन शांति प्रस्ताव पर एक नए प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है, जिसमें कीव द्वारा पूर्वी डोनबास क्षेत्र को सौंपना और अमेरिका समर्थित सुरक्षा गारंटी के बदले में अपनी सैन्य क्षमताओं को सीमित करने पर सहमति शामिल हो सकती है। एक विदेशी मीडिया ने चल रहे विचार-विमर्श से परिचित एक पश्चिमी अधिकारी के हवाले से बताया।
इसके अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि प्रस्ताव पर अभी काम चल रहा है और उन्होंने कहा कि किसी भी अंतिम समझौते के लिए रूस और यूक्रेन दोनों की ओर से समझौता करने की आवश्यकता होगी। ये जो 2014 से संघर्षरत हैं और 2022 में मास्को के आक्रमण के बाद स्थिति पूर्ण पैमाने पर युद्ध में बदल गई है। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान में प्रसारित कुछ बातें जिनमें मास्को की मांगों के पक्ष में विचार किए जाने वाले तत्व भी शामिल हैं अंतिम नहीं हैं तथा चर्चा जारी रहने पर इनमें बदलाव होने की संभावना है।
