25 रुपए की पहली सैलरी,विधवा की बेटी से शादी, ओमप्रकाश

नई दिल्ली ,एंटरटेनमेंट डेस्क : अच्छा सिनेमा अगर देखना है तो ये बिल्कुल नहीं है कि आज के दौर में आपको अच्छा सिनेमा देखने को नहीं मिलेगा। हालांकि एक दौर वो था जब फिल्मों की कहानी और फिल्म के किरदार दर्शकों के जेहन में बस जाते थे। कई किरदारों ने पर्दे पर जिस तरह से दर्शकों का दिल जीता, निजी जीवन भी उनका ऐसा रहा कि लोग उनकी तारीफ किए बिना खुद को रोक नहीं पाए। आज हम आपको एक ऐसे ही स्टार की कहानी बताएंगे, जिसने पर्दे पर तो दिल जीता ही, निजी जीवन में भी लोगों के दिलों में घर कर गए। आइए जानते हैं कहानी अभिनेता ओमप्रकाश की…

नाटकों से शुरू हुआ सफर

ओमप्रकाश का जन्म 19 दिसंबर 1919 को विभाजन से पहले लाहौर (पाकिस्तान) में हुआ था। पूरा नाम ओम प्रकाश छिब्बर था और पिता बड़े किसान थे। बचपन में उन्हें कभी किसी चीज की कोई कमी नहीं रही। कहा जाता है कि पैसा विरासत में मिला था तो दिक्कतों का सवाल पैदा नहीं होता। पिता की पंजाब, लाहौर और जम्मू में जमीनें थीं।

‘दासी’ से मिला बॉलीवुड में ब्रेक

ओमप्रकाश को बॉलीवुड में ब्रेक फिल्म दासी के जरिए मिला था। कहा जाता है कि एक बार वो एक शादी में सभी का मनोरंजन कर रहे थे, यहीं पर उन्हें फिल्ममेकर दलसुख पंचोली ने देखा और सीधा उन्हें अपनी फिल्म का ऑफर दे डाला। इस फिल्म के लिए उन्हें 80 रुपए फीस मिली।

हालांकि उन्हें असली पहचान साल 1949 में आई फिल्म लखपति के जरिए मिली थी। इस फिल्म में उन्होंने विलेन का किरदार निभाया था। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। कई फिल्मों में वो साइड एक्टर के तौर पर नजर आने लगे।

राजकपूर-नूतन से लेकर कई स्टार्स संग किया काम

ओमप्रकाश का करियर चला तो फिर उन्होंने रुकने का नाम नहीं लिया। 1950 से लेकर 1980 तक वो कई बड़ी फिल्मों का हिस्सा रहे। ओमप्रकाश ने अपने करियर में सोहनी माहीवाल, पटरानी, मैम साहिब, धोती लोटा और चौपाटी, चौकीदार, आजाद,मिस मैरी, हावड़ा ब्रिज, दस लाख, खानदान, साधु और शैतान, प्यार किए जा, गोपी, दिल दौलत समेत कई बड़ी फिल्मों का वो हिस्सा रहे।

वहीं उन्होंने डायरेक्टर बनकर भी अपनी पहचान बनाई। ये ओमप्रकाश ही थे जिन्होंने राजकपूर और नूतन जैसे स्टार्स को 1959 में आई फिल्म ‘कन्हैया’ में डायरेक्ट किया था। इसके अलावा उन्होंने मधुबाला, प्रदीप कुमार और भारत भूषण से सजी फिल्म गेटवे ऑफ इंडिया का भी वो डायरेक्शन कर चुके थे।

अमिताभ संग हिट रही जोड़ी

ओमप्रकाश के करियर में यूं तो उन्होंने कई बड़े स्टार्स के साथ काम किया, लेकिन उनका करियर हिट रहा अमिताभ बच्चन के साथ। या यूं कह सकते हैं कि अमिताभ के साथ उनकी जोड़ी पर्दे पर खूब पसंद की गई। अमिताभ के साथ उन्होंने नमक हलाल में काम किया। इस फिल्म में मानो अमिताभ और उनकी जोड़ी छा ही गई।

आम तौर पर बात हीरो-हीरोइन की होती है, लेकिन यहां तो ओमप्रकाश की जोड़ी अमिताभ के साथ जमी और जो जुगलबंदी नजर आई उसके तो क्या ही कहने। कुछ यही माजरा हमें फिल्म शराबी में भी नजर आया। शराबी में मुंशीलाल बनकर अमिताभ के साथ ओमप्रकाश के किरदार को खूब पसंद किया गया था।

विधवा की बेटी से कर ली थी शादी

मोटे गाल, मूंछें और चौड़ी कद काठी वाले ओमप्रकाश प्यार में मामले में बड़े पसीजने वाले दिल के थे। मतलब अब इससे ज्यादा क्या ही कहा जाए कि उन्होंने चलती राह में आई एक विधवा की बेटी से शादी कर ली थी। इसका किस्सा खुद उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में साझा किया था।

1994 में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि,

”मैं एक दिन पान की दुकान पर था। इसी बीच एक महिला दौड़ते हुए मेरे पास आई और सीधा कहने लगी कि वो विधवा है और उसकी चार बेटियां, मैं उनकी एक बेटी से शादी कर लूं। इसके बाद वो कहती हैं कि वो मुझे अपना दामाद बनाना चाहती हैं। आगे उन्होंने कहा कि, इस बारे में मेरी मां से भी बात कर ली थी और मां कह चुकी थीं कि कोई दिक्कत की बात नहीं। उन्होंने मेरे आगे अपनी साड़ी का पल्लू फैलाया और विनती की कि मैं मान जाऊं। मैं ये सब देखकर हैरान से ज्यादा भावुक हो गया। मैंने झट से शादी के लिए हां कह दी। इसके बाद मैं अपनी प्रेमिका के साथ पास गया और उसे ये सब बताया। वो तो सिर पकड़कर सड़क पर ही बैठ गई। मैंने उससे कहा, देखो वैसे भी तुम्हारे परिवारवाले तुम्हारी शादी मुझसे नहीं करेंगे, क्योंकि मैं हिंदू हूं। इसके बाद वो वहां चली गई। बाद में वो मेरी शादी में भी आई थी।”

ओमप्रकाश ने अपनी जिंदगी को खुश होकर जिया, वो जो चाहते थे वो उन्होंने पाया। भले ही समृद्ध परिवार से आए लेकिन मेहनत करने से नहीं चूके। फिल्मों में अपने किरदारों से लोगों के दिलों में रहे। जीवन के आखिरी दिनों में वो बीमार रहने लगे थे। दिल का दौरा पड़ा तो उन्होंने मुंबई के लीलावती अस्पताल में ले जाया।

इसके बाद वो कोमा में चले गए। उन्हें पता था कि वो अब नहीं बचेंगे और फिर 21 फरवरी 1998 को उनका निधन हो गया। जाते-जाते वो उन यादों को और उन किरदारों को छोड़ गए जिनकी बातें और जिनकी तारीफें आज हम और आप खुलकर कर रहे हैं और उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर उन्हें याद कर रहे हैं।

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