न्‍यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से बाहर हो सकते हैं ऋषभ पंत  

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नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क : cricket news : मौजूदा विजय हजारे ट्रॉफी में ऋषभ पंत का फॉर्म उतार-चढ़ाव भरा रहा है। चार मैचों में सिर्फ एक अर्धशतक लगाने वाले पंत अगर आगामी न्यूजीलैंड वनडे सीरीज से बिना एक भी मैच खिलाए बाहर कर दिए जाते हैं तो यह अजित अगरकर की अगुआई वाली चयन समिति का कुछ हद तक कठोर फैसला माना जा सकता है। भारतीय चयनकर्ता 11 जनवरी से वडोदरा में शुरू होने वाली न्यूजीलैंड के विरुद्ध तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए टीम का ऐलान करने वाले हैं। ऐसे में यह अटकलें तेज हैं कि क्या पंत अपनी जगह बचा पाएंगे।

यह किसी से छिपा नहीं है कि टीम प्रबंधन का कम से कम एक सदस्य पंत की हाई-रिस्क, हाई-रिवॉर्ड बल्लेबाजी शैली से पूरी तरह सहमत नहीं है और उनसे अधिक पारंपरिक अंदाज में खेलने की अपेक्षा रखता है। लेकिन दूसरे विकल्प के विकेटकीपर को उचित मौका दिए बिना बाहर करना स्वाभाविक तौर पर कई सवाल खड़े कर सकता है, जिनके ठोस जवाब देना मुश्किल होगा।

बेंच पर बैठे रहे पंत

2025 में पंत ने एक भी वनडे नहीं खेला। हालांकि वह चैंपियंस ट्रॉफी टीम और पिछले महीने दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध सीरीज का हिस्सा थे। इस दौरान विशेषज्ञ ओपनर रुतुराज गायकवाड़ को नंबर चार पर आजमाया गया, जबकि पंत तीनों मैचों में बेंच पर बैठे रहे। 2018 में पदार्पण के बाद से पंत ने अब तक केवल 31 वनडे खेले हैं। इसे बदकिस्मती कहें या उनकी बल्लेबाजी सोच उन्हें लगातार मौके सिर्फ दो चरणों में मिले।

पहला चरण 30 जून 2019 से 14 जनवरी 2020 तक रहा, जब उन्होंने 11 मैच खेले, फिर कोविड-19 के कारण ब्रेक आ गया। दूसरा और सर्वश्रेष्ठ दौर कोविड के बाद आया, जब 26 मार्च 2021 से 30 नवंबर 2022 के बीच उन्होंने 15 वनडे खेले। इसी दौरान वह एक शतक, दो 75+ और एक 85 रन की पारी खेल पाए। इसके बाद उनका भीषण कार हादसा हुआ। हादसे के बाद 2024 में वापसी के बावजूद पंत ने अब तक सिर्फ एक वनडे कोलंबो में खेला है, जो संयोग से मुख्य कोच गौतम गंभीर का पहला असाइनमेंट भी था।

विजय हजारे ट्रॉफी में भी खास प्रदर्शन नहीं

विजय हजारे ट्रॉफी में भी पंत का प्रदर्शन खास प्रभावी नहीं रहा है। चार मैचों में उनका एकमात्र उल्लेखनीय स्कोर 70 रन रहा, जबकि सीजन के चर्चित खिलाड़ी ईशान किशन ने कर्नाटक के विरुद्ध झारखंड की ओर से मध्यक्रम में बल्लेबाजी करते हुए 14 छक्के जड़ दिए। इसके अलावा ध्रुव जुरैल ने उत्तर प्रदेश के लिए डैडी हंड्रेड लगाया है और वह पिछली वनडे सीरीज में टीम का हिस्सा भी थे।

हालांकि, बेंगलुरु के सेंटर आफ एक्सीलेंस में दिल्ली के मैचों की पिचों को बल्लेबाजों के लिए स्वर्ग नहीं कहा जा सकता, लेकिन 20-25 के आसपास आउट होना कोई मजबूत बहाना भी नहीं है। इसके बावजूद, प्रभाव के लिहाज से पंत अभी भी जुरैल से कुछ पायदान ऊपर माने जाते हैं।

15 खिलाड़ियों की टीम में तीन विकेटकीपर रखना विलासिता जैसा है। केएल राहुल जब नंबर एक बल्लेबाज-विकेटकीपर के रूप में पक्की जगह बनाए हुए हैं तो यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या किशन को पंत या जुरैल में से किसी एक की कीमत पर मौका मिलता है खासकर तब, जब दोनों को अब तक खेलने का अवसर नहीं मिला।

पडिक्कल के नाम पर चर्चा

देवदत्त पडिक्कल के नाम पर भी चर्चा हो सकती है। 37 मैचों में 92 से अधिक की औसत और मौजूदा राष्ट्रीय चैंपियनशिप में चार मैचों में तीन शतक उनके शानदार फार्म को दर्शाते हैं। लेकिन कप्तान शुभमन गिल की वापसी, एक छोर पर अनुभवी रोहित शर्मा और पिछली वनडे सीरीज के शतकवीर यशस्वी जायसवाल के होते हुए शीर्ष क्रम में पडिक्कल के लिए जगह बनाना मुश्किल है।

यह भी नहीं भूलना चाहिए कि विशेषज्ञ ओपनर रुतुराज गायकवाड़ इस समय नंबर चार पर खेल रहे हैं। वह स्थान जो चोटिल होने से पहले नियमित उपकप्तान श्रेयस अय्यर का था। गायकवाड़ के शतक के बाद शीर्ष चार में बदलाव की गुंजाइश कम दिखती है, जब तक टीम में अतिरिक्त विशेषज्ञ शीर्ष बल्लेबाज न जोड़ा जाए।

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