Davos : भारत की दमदार शुरुआत, दुनिया में छाया इंडिया का AI मॉडल

india-news

नई दिल्ली,डिजिटल डेस्क :दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत न केवल एआई को तेजी से अपना रहा है, बल्कि इसे आम लोगों तक पहुंचाने और कम लागत में ज्यादा फायदा देने पर भी काम कर रहा है।

अश्विनी वैष्णव ने ‘AI Power Play’ नामक उच्चस्तरीय वैश्विक पैनल चर्चा में हिस्सा लिया। इस पैनल में एआई से जुड़ी वैश्विक राजनीति, आर्थिक असर, शासन की चुनौतियां और इसके समावेशी उपयोग पर चर्चा हुई।

इस चर्चा का संचालन यूरेशिया ग्रुप के अध्यक्ष इयान ब्रेमर ने किया। पैनल में IMF की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा, माइक्रोसॉफ्ट के अध्यक्ष ब्रैड स्मिथ, सऊदी अरब के निवेश मंत्री खालिद अल-फलीह सहित कई बड़े वैश्विक नेता शामिल थे। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत खुद को दुनिया के उन शुरुआती देशों के समूह में मानता है जो एआई को तेजी से अपना और विकसित कर रहे हैं।

भारत की एआई रणनीति

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने एआई आर्किटेक्चर के सभी पांच स्तरोंएप्लिकेशन, मॉडल, चिप्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जामें व्यवस्थित प्रगति की है। भारत का फोकस सिर्फ बहुत बड़े एआई मॉडल बनाने पर नहीं है, बल्कि असल दुनिया में उनके उपयोग और निवेश पर लाभ (ROI) पर है।

उन्होंने बताया कि लगभग 95 प्रतिशत वास्तविक समस्याओं का समाधान 20 से 50 अरब पैरामीटर वाले मॉडलों से ही हो सकता है। जरूरी नहीं कि सबसे बड़ा मॉडल ही सबसे ज्यादा फायदा दे। आईएमएफ की एआई रैंकिंग पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के अनुसार भारत एआई पैठ और तैयारी में दुनिया में तीसरे और एआई प्रतिभा में दूसरे स्थान पर है।

जीपीयू, स्किल और भरोसेमंद एआई पर सरकार का जोर

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी के जरिए जीपीयू की कमी दूर करने का फैसला किया है। इसके तहत 38000 जीपीयू को एक साझा राष्ट्रीय कंप्यूटिंग सुविधा के रूप में उपलब्ध कराया गया है, जिसे छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को वैश्विक लागत के लगभग एक-तिहाई दाम पर दिया जा रहा है। उन्होंने देशभर में एआई स्किल कार्यक्रम का भी जिक्र किया, जिसका लक्ष्य एक करोड़ लोगों को प्रशिक्षित करना है, ताकि आईटी इंडस्ट्री और स्टार्टअप एआई का बेहतर इस्तेमाल कर सकें।

एआई के नियमन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ कानून काफी नहीं हैं। पक्षपात पहचानने, डीपफेक को सटीक तरीके से पकड़ने और सुरक्षित एआई के लिए तकनीकी उपाय जरूरी हैं, और भारत इस दिशा में स्वदेशी समाधान विकसित कर रहा है।

India’s cricketers will score 200 against New Zealand Designs of Mehendi for Karwa Chauth in 2024 Indian Women’s T20 World Cup Qualifiers Simple Fitness Advice for the Holidays Top 5 Business Schools in the World