लखनऊ ,अमरेंद्र पटेल : Siddiqui leaves congress: विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच यूपी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपने साथियों सहित कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है।
विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में लगी कांग्रेस को जोरदार झटका लगा है। पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दकी ने समर्थकों के साथ शनिवार को कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया। उनका कहना है कि अगले सप्ताह नई रणनीति का खुलासा करेंगे।राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय सहित अन्य नेताओं को भेजे गए इस्तीफे में पूर्व विधायक फरहत हसन उर्फ हाजी शब्बन, पूर्व विधायक राम जियावन, पूर्व एमएलसी हुस्ना सिद्दकी सहित 73 लोगों के नाम हैं।
इसमें पूर्व नगर पालिका व पंचायत अध्यक्ष व लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी रहे नेता शामिल हैं। पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दकी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी कांग्रेस के किसी नेता से शिकायत नहीं है। वह दलितों, अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए कांग्रेस में आए थे। मौजूदा परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश कांग्रेस में फासीवादी ताकतों से लड़ने का माद्दा नहीं दिख रहा है।
अगले सप्ताह नई रणनीति का खुलासा करेंगे
ऐसे में उन्होंने अपने समर्थकों के साथ अलग रास्ता तय करने का मन बनाया है। सभी के साथ मशविरा चल रहा है। अगले सप्ताह नई रणनीति का खुलासा करेंगे। मालूम हो कि 1988 से बांदा नगर पालिका अध्यक्ष के रूप में सियासी सफर शुरू करने वाले नसीमुद्दी सिद्दकी बसपा से 1991 में विधायक बने।
फिर उन्होंने सियासी सफर पर पीछे मुड़ कर नहीं देखा। वह बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। दौर बदला। बसपा प्रमुख मायावती से अनबन हुई। फरवरी 2018 में उन्होंनने कांग्रेस का हाथ थामा लिया। उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी गई।
आजाद समाज पार्टी या कोई और दल
पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दकी ने अभी किसी दल के साथ जाने पर हामी नहीं भरी है, लेकिन सियासी गलियारे में चर्चा है कि वह आजाद समाज पार्टी के साथ नई पारी की शुरुआत कर सकते हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद चंद्रशेखर और पूर्व मंत्री के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई है। यह अलग बात है कि पार्टी में अभी उनकी भूमिका तय नहीं हो पाई है। चर्चा यह भी है कि वह प्रदेश में अन्य विपक्षी दलों के साथ भी वार्ता कर रहे हैं। इस सवाल के जवाब में पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिर्फ इतना कहते हैं कि वह वहीं जाएंगे, जहां अल्पसंख्यकों, दलितों के हितों की रक्षा होगी। बाबा साहब डा. भीमराव आंडेकर और कांशीराम के सपनों को पूरा करने का मौका दिखेगा।
