नई दिल्ली, न्यूज़ डेस्क : international customs day : दुनिया भर में हर साल 26 जनवरी को अंतर्राष्ट्रीय सीमा शुल्क दिवस मनाया जाता है। यह वैश्विक व्यापार, सुरक्षा और सहयोग की उस अदृश्य व्यवस्था का उत्सव है, जो सीमाओं के पार लोगों और व्यवसायों को जोड़ती है। यह दिन सीमा शुल्क के उन संयुक्त प्रयासों को समर्पित है, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करते हैं, सहयोग को बढ़ावा देते हैं, प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग करते हैं और पारंपरिक व नए भागीदारों को परिवर्तन की प्रक्रिया के केंद्र में रखते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय सीमा शुल्क दिवस, जो हर वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है, वैश्विक व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को आकार देने में सीमा शुल्क की निर्णायक भूमिका का प्रमाण है। यह दिवस वर्ल्ड कस्टम्स ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूसीओ) की वर्षगांठ का भी स्मरण कराता है, एक ऐसा अंतर-सरकारी निकाय जो विश्व स्तर पर सीमा शुल्क प्रशासन को सुदृढ़ और प्रभावी बनाने के लिए समर्पित है।
इस दिन को मनाने का मूल उद्देश्य व्यापार संचालन में वैश्विक सहयोग के महत्व को रेखांकित करना है। आज की परस्पर जुड़ी हुई अर्थव्यवस्थाओं में कोई भी देश अकेले काम नहीं कर सकता। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की निर्बाधता के लिए सीमा शुल्क संचालन में एकीकृत और समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है, और यही संदेश अंतर्राष्ट्रीय सीमा शुल्क दिवस देता है।
अंतर्राष्ट्रीय सीमा शुल्क दिवस केवल व्यापार की तकनीकी बारीकियों तक सीमित नहीं
अंतर्राष्ट्रीय सीमा शुल्क दिवस केवल व्यापार की तकनीकी बारीकियों तक सीमित नहीं है। सीमा शुल्क प्रक्रियाएं अक्सर प्रत्येक राष्ट्र की अनूठी परंपराओं, मूल्यों और नियामक ढांचों को प्रतिबिंबित करती हैं। यह दिन याद दिलाता है कि अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का ताना-बाना उसके हर धागे की मजबूती पर निर्भर करता है। प्रत्येक देश की सीमा शुल्क प्रणाली उस व्यापक वैश्विक ताने-बाने में योगदान देती है, जो एकीकृत वैश्विक समुदाय को मजबूती प्रदान करता है।
यह दिन अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार सामानों के सुगम और सुरक्षित प्रवाह को सुनिश्चित करने में कस्टम्स अधिकारियों और एजेंसियों की अहम भूमिका को सम्मानित करता है। यह दिन न केवल व्यापार प्रबंधन में उनके योगदान को याद करता है, बल्कि राजस्व संग्रहण, आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा और अवैध व्यापार पर अंकुश लगाने जैसी जिम्मेदारियों को भी उजागर करता है।
यह विषय वैश्विक व्यापार संचालन की दक्षता बढ़ाने, सुरक्षा बनाए रखने और आर्थिक समृद्धि में योगदान देने के प्रति कस्टम्स अधिकारियों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वर्ल्ड कस्टम्स ऑर्गनाइजेशन अपने सदस्य देशों को प्रेरित करता है कि वे इस अवसर पर अपने प्रयासों को प्रदर्शित करें और यह बताएं कि मजबूत कस्टम्स प्रक्रियाएं किस तरह वैश्विक व्यापार और सुरक्षा को सुदृढ़ करती हैं। अंतर्राष्ट्रीय सीमा शुल्क दिवस की जड़ें कस्टम्स सहयोग परिषद (सीसीसी) के गठन से जुड़ी हैं, जिसे आज वर्ल्ड कस्टम्स ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूसीओ) के नाम से जाना जाता है।
सीसीसी की स्थापना 1952 में एक अंतर-सरकारी संस्था के रूप में हुई थी, जिसका उद्देश्य दुनिया भर में कस्टम्स प्रशासन की दक्षता बढ़ाना था। इसका पहला सत्र 26 जनवरी 1953 को बेल्जियम के ब्रुसेल्स में आयोजित हुआ, जिसमें 17 संस्थापक सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यहीं से वैश्विक व्यापार प्रबंधन में कस्टम्स प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और बेहतर बनाने के संगठित प्रयासों की शुरुआत हुई।
