धर्मशाला , संवाददाता : निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रधानमंत्री व संसद सदस्यों के लिए पहले चरण का मतदान रविवार को संपन्न हो गया। इसके लिए निर्वासित सरकार के चुनाव आयोग ने 27 देशों में 87 क्षेत्रीय चुनाव कार्यालयों की देखरेख में 309 मतदान केंद्र बनाए और 1800 चुनाव अधिकारी तैनात किए थे। इस दौरान 91,000 तिब्बतियों ने मतदान किया।
आम चुनाव अवधि के दौरान बस्तियों से दूर रहने वाले तिब्बतियों के लिए 31 मतदान केंद्र अतिरिक्त रूप से बनाए गए थे। दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 26 अप्रैल को होगा।
निर्वासित तिब्बतियों ने चुनाव के माध्यम से चीन को संदेश दिया है कि उन्होंने हार नहीं मानी है। अपने देश लौटने और फिर से पहले की तरह वहां रहने की उम्मीदें बरकरार हैं। हिमाचल के धर्मशाला समेत भारत के अन्य राज्यों में तिब्बतयों ने मतदान प्रक्रिया में भाग लिया।
केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के मुख्य चुनाव आयुक्त लोबसांग यशी ने मतदान को एक संकेत बताया कि तिब्बतियों ने हार नहीं मानी है। उन्होंने कहा, चुनाव सिर्फ शासन या प्रशासन के लिए नहीं, बल्कि तिब्बत की आजादी के लिए हुआ है।
कुछ देशों में कूटनीतिक संवेदनशीलता के कारण मतदान के दौरान चुनौतियों का सामना करना पड़ा। यशी ने कहा कि सीटीए 70 लाख तिब्बतियों के वास्तविक शासन का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि चीन के कब्जे के बावजूद, तिब्बती अब भी मुक्त तिब्बत की आकांक्षा रखते हैं। मतदान प्रतिशत की जानकारी सभी देशों में हुए मतदान की रिपोर्ट एकत्र करने के बाद मिलेगी।
