नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : बांग्लादेश की राजधानी ढाका के बीचों-बीच शुक्रवार को हिंसक झड़पें हुईं। नौवें नेशनल पे स्केल को लागू करने की मांग कर रहे सरकारी कर्मचारियों का चीफ एडवाइजर मुहम्मद यूनुस के सरकारी आवास जमुना के बाहर पुलिस से टकराव हो गया, जिसमें कई लोग घायल हुए हैं।
यह झड़पें आम चुनाव से छह दिन पहले हुई हैं। इससे पहले हिंसा की वजह से तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद छोड़कर उन्हें भारत आना पड़ा था। इसके बाद यूनुस के नेतृत्व में एक केयरटेकर सरकार बनाई गई, जिसने निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव करवाने का वादा किया।
क्यों भड़की हिंसा ?
यह अशांति आज सुबह शुरू हुई जब देश भर से प्रदर्शनकारी शहीद मीनार पर इकट्ठा हुए और जमुना की ओर मार्च किया। इन लोगों की मांग है कि नौवें राष्ट्रीय वेतन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर गजट को तुरंत प्रकाशित और लागू किया जाए।
पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले और किया लाठी चार्ज
‘पेट में चावल नहीं है, मुंह में कैसा विकास?’ जैसे नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर उनकी रोजी-रोटी की चिंताओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। सुबह 11.30 बजे प्रदर्शनकारियों ने शाहबाग में पुलिस बैरिकेड्स तोड़ दिए और जमुना एंट्रेंस की ओर बढ़ने लगे। भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश में पुलिस ने वॉटर कैनन, आंसू गैस और साउंड ग्रेनेड चलाए और लाठीचार्ज किया।
विरोध प्रदर्शन को आवास तक पहुंचने से रोकने के लिए वर्दीधारी सैनिकों को भी तैनात किया गया था। खबरों के मुताबिक, झड़पें तेज होने से कई लोग घायल हो गए। जब एक सीनियर पुलिस अधिकारी डिप्टी कमिश्नर मसूद आलम ने एक प्रदर्शनकारी से सवाल किया, “क्या तुम चुनाव में गड़बड़ी करने जमुना आए हो?” तो तनाव और बढ़ गया।
चुनाव का बहिष्कार करने की चेतावनी दी
सरकारी कर्मचारियों ने कहा कि पुलिस की लगातार कार्रवाई के गंभीर राजनीतिक नतीजे हो सकते हैं। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “अगर हमले जारी रहे तो हम चुनावों का बहिष्कार करेंगे।” पुलिस ने बाद में बताया कि वे स्थिति को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं। शुक्रवार दोपहर तक शाहबाग और जमुना के आसपास का इलाका तनावपूर्ण बना हुआ था, भारी सुरक्षा तैनात थी और अधिकारी स्थिति पर करीब से नजर रख रहे थे।
