रिपब्लिक समाचार, एजेंसी : नई दिल्ली में आयोजित औषधीय पौधों पर ‘चिंतन शिविर’ के दौरान आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि औषधीय पौधे केवल भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली की नींव ही नहीं हैं, बल्कि देश की जैविक और आर्थिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा भी हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद और अन्य आयुष प्रणालियों को विश्व स्तर पर मिल रही पहचान भारत को गुणवत्तापूर्ण औषधीय पौधों और हर्बल उत्पादों का बड़ा आपूर्तिकर्ता बना सकती है।
यह चिंतन शिविर राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी), आयुष मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया। मंत्री ने कहा कि औषधीय पौधों का क्षेत्र ‘विकसित भारत 2047’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य के अनुरूप है। इससे ग्रामीण समुदायों को स्थायी आजीविका के अवसर मिल सकते हैं।
उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में किसानों, उद्यमियों और शोधकर्ताओं के लिए मिलकर काम करने के बड़े अवसर मौजूद हैं। औषधीय पौधों की खेती से किसानों की आय बढ़ सकती है और देश में हर्बल उद्योग को मजबूती मिल सकती है।
गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी कई कदम उठाए गए
मंत्री ने एनएमपीबी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बोर्ड ने उत्पादन से लेकर बाजार तक की पूरी श्रृंखला को मजबूत करने का काम किया है। गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि एनएमपीबी की रजत जयंती केवल उपलब्धियों का अवसर नहीं है, बल्कि आगे की दिशा तय करने का भी समय है। उन्होंने जोर दिया कि भविष्य में वैज्ञानिक प्रमाण, ट्रेसबिलिटी और जलवायु अनुकूलन पर ध्यान देना होगा, ताकि भारत की विविध औषधीय वनस्पतियों का संरक्षण और सही उपयोग हो सके।
उन्होंने बताया कि मंत्रालय क्षेत्रीय सुविधा केंद्रों, अनुसंधान साझेदारी और डिजिटल प्लेटफॉर्म को मजबूत करने पर काम कर रहा है। इससे किसानों, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा।
एनएमपीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. महेश कुमार दाधीच ने कहा कि बोर्ड खेती से लेकर बाजार तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। नवाचार और सतत पद्धतियों के माध्यम से इस क्षेत्र को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि औषधीय पौधों के क्षेत्र को सही दिशा और समर्थन मिले, तो यह भारत की अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य प्रणाली दोनों को मजबूती दे सकता है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि भारत वैश्विक हर्बल बाजार में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
कुल मिलाकर, औषधीय पौधों का क्षेत्र ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
-(इनपुटःएजेंसी)
