जयशंकर बोले – भारत की जन केंद्रित नीतियां उसे भरोसेमंद बनाती हैं

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नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : Global Economic Cooperation Summit : विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मुश्किल दौर में भारत के ताकतवर बनने के संकल्प को ग्लोबल इकोनॉमिक कोऑपरेशन समिट में रेखांकित किया। ये शिखर सम्मेलन 17-19 फरवरी तक मुंबई में आयोजित किया जा रहा है। इसमें विकसित और विकासशील देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। फ्यूचर इकोनॉमिक कोऑपरेशन काउंसिल (एफईसीसी) का ये आयोजन भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से हो रहा है।

जयशंकर ने एक्स पर लिखा

विदेश मंत्री ने एक्स प्लेटफॉर्म पर इस आयोजन की तस्वीरों के साथ एक टेक्स्ट पोस्ट में लिखा, “मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फणडवीस के साथ ग्लोबल इकोनॉमिक कोऑपरेशन कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन में हिस्सा लिया।” उन्होंने बताया कि मंच से उन्होंने भारत के मुश्किल दौर में ताकतवर बनने की कोशिशों पर भी प्रकाश डाला। कहा, “हमारी सरकार की तेजतर्रार, प्रैक्टिकल और जन केंद्रित नीति भारत को दुनिया का एक भरोसेमंद साझेदार बनाती है।”

शिखर सम्मेलन का उद्देश्य भू-आर्थिक स्थिति, व्यापार कूटनीति और निवेश पर मंथन करना है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यहां भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और रणनीतिक साझेदारी पर बल दिया।

विदेश मंत्री ने दुनिया में आ रहे बदलावों की बात की

डॉ. एस जयशंकर ने मंच से दुनिया में आ रहे बदलावों की बात की। उन्होंने कहा, “मौजूदा ग्लोबल ऑर्डर हमारी आंखों के सामने साफ तौर पर बदल रहा है। रिप्लेसमेंट बनाना मुश्किल है, और ऐसा लगता है कि हम एक अंधेरे की ओर बढ़ रहे हैं। यह जोखिम भरा, अप्रत्याशित,और शायद खतरनाक भी हो सकता है। हमने इसे अलग-अलग जगहों पर पहले ही देखा है। मौजूदा ऑर्डर के पहलू उभरते हुए ऑर्डर के तत्वों के साथ-साथ रहेंगे। जब चुनाव की बात आएगी तो इकोनॉमिक्स पॉलिटिक्स और सिक्योरिटी को रास्ता देगी और एआई के जमाने में टेक्नोलॉजी पहले से कहीं ज्यादा ट्रांसफॉर्मेटिव होगी।”

जारी रहेंगे रिफॉर्म एक्सप्रेस

जयशंकर ने रिफॉर्म एक्सप्रेस को जारी रखने की बात भी यहां कही। वो बोले, ” वैश्विक चुनौतियों से निपटने का भारत का जवाब है कि वह अपनी राष्ट्रीय क्षमताओं को और बढ़ाए, ग्रोथ की चुनौतियों का पूरी तरह से सामना करे, और शॉर्ट-टर्म मुद्दों और लॉन्ग-टर्म संभावनाओं, दोनों से निपटे। रिफॉर्म एक्सप्रेस आगे भी जारी रहेगी। इसका असर सप्लाई और डिमांड दोनों तरफ होगा। मजबूत स्थिति से, भारत अपने अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ ज्यादा गहराई से जुड़ रहा है। यह हाल ही में हुए ट्रेड डील्स में दिखा है। हम उत्पादन, सेवाओं, टेक्नोलॉजी, स्किल्स और टैलेंट पर ग्लोबल कैलकुलस में भी ज्यादा अहम होंगे।”

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