नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : iran news : अमेरिका-इजराइल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी जगह कौन लेगा। यह सवाल इसलिए भी, क्योंकि ईरान का सुप्रीम लीडर राष्ट्रपति से भी ज्यादा ताकतवर होता है।
ईरान ने अभी नए सुप्रीम लीडर के बारे में कुछ नहीं कहा है, लेकिन सरकारी मीडिया ‘फार्स’ समेत कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके बेटे मुजतबा खामेनेई इस पद पर चुने जा सकते हैं। उन्हें पिछले 2 साल से सुप्रीम लीडर बनाने की तैयारी चल रही थी।
ईरान में सुप्रीम लीडर को ‘रहबर’ कहा जाता है। ‘रहबर’ का मतलब है, मार्गदर्शक या रास्ता दिखाने वाला। 88 मौलवियों की असेंबली सुप्रीम लीडर का चुनाव करती है।
दुनिया में ईरान और वेटिकन सिटी ही ऐसे देश हैं जहां धार्मिक नेता सबसे ज्यादा ताकतवर हैं। ईरान में सुप्रीम लीडर का दर्जा ठीक वैसा ही है, जैसा वेटिकन में पोप को हासिल है।
खामेनेई ने बीमार होने पर मुजतबा को बनाया था उत्तराधिकारी
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने अपने दूसरे बेटे मुजतबा खामेनेई को साल 2024 में उत्तराधिकारी बनाया था। खामेनेई ने बीमारी के चलते यह फैसला लिया था। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की एक्सपर्ट असेंबली ने 26 सितंबर 2024 को ही नए सुप्रीम लीडर का चुनाव कर लिया था। खामेनेई ने असेंबली के 60 सदस्यों को बुलाकर गोपनीय तरीके से उत्तराधिकारी पर फैसला लेने कहा था।
खामेनेई की मौत के बाद अब मुजतबा सार्वजनिक रूप से सुप्रीम लीडर के दावेदार के तौर पर सामने आ सकते हैं।
इस्लामिक मामलों के जानकार हैं मुजतबा खामेनेई
मुजतबा अपने पिता की तरह ही इस्लामिक मामलों के जानकार हैं। वे पहली बार 2009 में दुनिया की नजरों में आए। उन्होंने ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों को सख्ती से कुचला, जिसमें कई लोग मारे गए। तब राष्ट्रपति चुनाव में कट्टरपंथी नेता महमूद अहमदीनेजाद को सुधारवादी नेता मीर होसैन मौसवी पर जीत मिली थी।
सुधारवादी नेताओं ने दावा किया कि चुनाव में भारी पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। इसके बाद लाखों लोग सड़कों पर उतर आए थे। इसे ‘ईरानी ग्रीन मूवमेंट’ का नाम दिया गया। यह दो साल तक चला, लेकिन ईरानी सरकार ने इसे बल प्रयोग करके दबा दिया था। कहा गया था कि इसके पीछे मुजतबा खामेनेई का दिमाग है।
