विदेश मंत्रालय ने खाड़ी संघर्ष पर जताई चिंता, भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

randhir-jaiswal

नई दिल्ली, ब्यूरो : भारत ने खाड़ी क्षेत्र में शुरू हुए संघर्ष पर गहरी चिंता जताते हुए एक बार फिर सभी पक्षों से संयम, संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपील की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा क‍ि हमने 28 फरवरी 2026 को ईरान और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष की शुरुआत पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की थी। उस समय भी भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने, स्थिति को और न बिगाड़ने तथा नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था। दुर्भाग्यवश, पवित्र रमजान के महीने में क्षेत्र की स्थिति लगातार और गंभीर रूप से बिगड़ती गई है।

हाल के दिनों में हमने न केवल संघर्ष की तीव्रता में वृद्धि देखी है, बल्कि इसका अन्य देशों तक फैलाव भी देखा है। विनाश और जनहानि बढ़ती जा रही है, जबकि सामान्य जीवन और आर्थिक गतिविधियां ठप हो रही हैं। इस क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता में महत्वपूर्ण हित रखने वाले एक पड़ोसी देश के रूप में ये घटनाक्रम हमारे लिए गहरी चिंता का विषय हैं।

भारतीयों की सुरक्षा और कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता

खाड़ी क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते और कार्य करते हैं। उनकी सुरक्षा और कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले किसी भी घटनाक्रम से हम उदासीन नहीं रह सकते। हमारे व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाएं भी इसी क्षेत्र से होकर गुजरती हैं। किसी भी बड़े व्यवधान के भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। एक ऐसे देश के रूप में जिसके नागरिक वैश्विक कार्यबल में प्रमुख भूमिका निभाते हैं, भारत वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों का दृढ़ता से विरोध करता है। पिछले कुछ दिनों में ऐसे हमलों के परिणामस्वरूप कुछ भारतीय नागरिकों की मृत्यु हुई है या वे लापता हैं।

इस पृष्ठभूमि में भारत संवाद और कूटनीति की अपनी अपील को दृढ़ता से दोहराता है। हम स्पष्ट रूप से संघर्ष के शीघ्र अंत के पक्ष में अपनी आवाज उठाते हैं। पहले ही अनेक निर्दोष जानें जा चुकी हैं, जिसके लिए हम गहरा शोक व्यक्त करते हैं। प्रभावित देशों में भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास भारतीय नागरिकों और सामुदायिक संगठनों के साथ लगातार संपर्क में हैं तथा समय-समय पर आवश्यक परामर्श जारी कर रहे हैं। उन्होंने संघर्ष के कारण फंसे लोगों को हरसंभव सहायता भी प्रदान की है। दूतावास और वाणिज्य दूतावास इस संघर्ष से जुड़े विभिन्न वाणिज्यिक एवं दूतावासी मामलों के समाधान में सक्रिय रहेंगे।

हम इस क्षेत्र की सरकारों तथा अन्य प्रमुख साझेदारों के साथ भी संपर्क में हैं। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने अपने समकक्षों के साथ चर्चा की है। सरकार विकसित होती स्थिति पर निकटता से नजर बनाए रखेगी और राष्ट्रीय हित में आवश्यक निर्णय लेती रहेगी।

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