भारत और फिनलैंड के संबंधों में स्थायित्व का दौर -Alexander Stubb

Alexander-Stubb

नई दिल्ली, एजेंसी : फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने रविवार को भारत का अपना राजकीय दौरा पूरा किया और ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने उन्हें गर्मजोशी से विदा किया।

राष्ट्रपति स्टब के भारत दौरे को लेकर विदेश मंत्रालय (एमईए) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के भारत से जाने के साथ ही एक फायदेमंद दौरा खत्म हुआ। एयरपोर्ट पर ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया।”

विदेश मंत्रालय ने कहा

विदेश मंत्रालय ने कहा, “भारत-फिनलैंड के संबंधों में यह एक अहम पल है क्योंकि यह संबंध ‘डिजिटलाइजेशन और स्थायित्व में रणनीतिक साझेदारी’ तक पहुंच गया है, जिससे दोनों देशों के संबंधों में काफी तेजी आएगी।”

इस सप्ताह अपने भारत दौरे के दौरान स्टब ने सहयोगपूर्ण, न्यायसंगत और प्रतिनिधित्वपूर्ण बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था के निर्माण में भारत और ग्लोबल साउथ की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फिनलैंड के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5जी व 6जी टेलीकम्युनिकेशन, एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे खास टेक्नोलॉजी सेक्टर में सहयोग बढ़ेगा। स्टब के साथ बातचीत के दौरान, दोनों पक्ष रिसर्च में सहयोग को मजबूत करने और इनोवेशन को बढ़ावा देने पर भी सहमत हुए।

भारत के विज्ञान व तकनीक विभाग और फिनलैंड की नवाचार फंडिंग एजेंसी बिजनेस फिनलैंड के बीच जॉइंट रिसर्च कॉल्स रिन्यूएबल एनर्जी, स्मार्ट सिटीज, हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्र पर फोकस करेंगी।

वहीं, इससे पहले 5 मार्च को नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग में अपने संबोधन में स्टब ने कहा था कि शक्ति संतुलन बदल गया है और ग्लोबल साउथ के पास भौगोलिक और आर्थिक दोनों ताकतें हैं।

हम यहां एक ऐसे देश में हैं जो 7 फीसदी की ग्रोथ रेट-

उन्होंने कहा था, “हम यहां एक ऐसे देश में हैं जो 7 फीसदी की ग्रोथ रेट दिखा रहा है, शायद 2047 तक। यह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। लेकिन मेरा तर्क है कि पश्चिमी देशों के प्रभाव वाली दुनिया का युग खत्म हो गया है; यही लंबे समय से चली आ रही प्रक्रिया में व्यवधान है।

यह साफ है लेकिन पूरे पश्चिम में इसे समझने में कुछ समय लगेगा। अतीत हमें सबक दे सकता है, लेकिन यह हमें शायद ही कभी समाधान देता है। इसलिए, मुझे लगता है कि किसी भी विश्लेषण के लिए एक अच्छा स्टार्टिंग पॉइंट यह है कि दुनिया जैसी है, उसके साथ वैसा ही बर्ताव किया जाए, न कि ऐसी दुनिया के साथ जैसा हम चाहते हैं कि वह हो।”

स्टब ने कहा कि दुनिया भर में हिंसा का इस्तेमाल विदेश नीति के हथियार के तौर पर किया जा रहा है। उन्होंने यूक्रेन, पश्चिम एशिया और सूडान में चल रहे संघर्ष के बारे में बात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूएई के राष्ट्रपति व कतर के अमीर के साथ अपनी बातचीत का भी जिक्र किया।

उन्होंने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की यूरोप के बारे में पहले की बातों का समर्थन किया और कहा, “मेरे पसंदीदा विदेश मंत्रियों में से एक डॉ. जयशंकर ने कहा है और मैं एक बार फिर कोट करता हूं, ‘यूरोप को इस सोच से बाहर निकलना होगा कि यूरोप की समस्याएं दुनिया की समस्याएं हैं, लेकिन दुनिया की समस्याएं यूरोप की समस्याएं नहीं हैं।’

मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूं जयशंकर। हमें यह समझने की जरूरत है कि मैंने जिन तीन उदाहरणों का जिक्र किया, यूक्रेन, मिडिल ईस्ट व सूडान और कई दूसरे युद्ध और झगड़े, ये सभी हमारी समस्याएं हैं।”

India’s cricketers will score 200 against New Zealand Designs of Mehendi for Karwa Chauth in 2024 Indian Women’s T20 World Cup Qualifiers Simple Fitness Advice for the Holidays Top 5 Business Schools in the World