कोलकाता, ब्यूरो : बंगाल के विधानसभा (विस) चुनावों के 74 वर्षों के इतिहास में पहली बार दो चरणों में मतदान होने जा रहा है। 1952 से 1996 तक राज्य में हुए पहले 12 विस चुनावों में एक चरण में वोट पड़े थे। 2001 के विस चुनाव में इसे बढ़ाकर सीधे पांच कर दिया गया।
2006 का विस चुनाव भी पांच चरणों में हुआ था। उसके बाद 2011 व 2016 के विस चुनाव छह-छह चरणों में हुए थे और 2021 में हुआ पिछला विस चुनाव सर्वाधिक आठ चरणों में हुआ था। इस बार पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल व दूसरे का 29 अप्रैल को होगा यानी दोनों चरणों के बीच एक सप्ताह का भी समय नहीं होगा। पहले चरण में 152 व दूसरे में 142 यानी कुल 294 सीटों के लिए वोट पड़ेंगे और चार मई को मतगणना होगी।
पिछले बार 8 चरणों में हुआ था मतदान
पिछली बार आठ चरणों में मतदान हुआ था। पहले चरण के मतदान 27 मार्च व अंतिम चरण का 29 अप्रैल को हुआ था। इस बार भी बंगाल में आखिरी चरण का मतदान 29 अप्रैल को ही होने जा रहा है, हालांकि मतगणना गत बार की दो मई की जगह चार मई को होगी। पिछली बार पहले व अंतिम चरण में 30 व 35 सीटों के लिए वोट पड़े थे।
सर्वाधिक सीटें चौथे चरण में 45 थीं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सभी पक्षों के साथ विस्तार से चर्चा व उनकी राय जानने के बाद यह निर्णय लिया गया है। ऐसा करना जरुरी भी था। यह सभी के लिए सुविधाजनक होगा।उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि चुनाव आयोग बंगाल में दो चरणों में मतदान कराने के लिए पूरी तरह से तैयार है और इसमें किसी तरह की समस्या नहीं होगी।
केंद्रीय बलों की उपलब्धता को लेकर नहीं होगी समस्या
विश्लेषकों का कहना है कि बंगाल में जब तक मतदान का दौरा शुरू होगा, तब तक असम, केरल व पुडुचेरी तीनों राज्यों में नौ अप्रैल को एक चरण में वोट पड़ चुके होंगे। 23 अप्रैल को बंगाल के अलावा सिर्फ तमिलनाडु में वोट पड़ रहे होंगे। तमिलनाडु में भी 23 को एक चरण में ही मतदान संपन्न हो जाएगा।
उसके बाद 29 अप्रैल को सिर्फ बंगाल में दूसरे व अंतिम दौर का मतदान बाकी रहेगा। ऐसे में बंगाल में दोनों चरणों में केंद्रीय बलों की उपलब्धता को लेकर समस्या नहीं होनी चाहिए, हालांकि असम, केरल व पुडुचेरी मेंनौ अपै्रल को एक ही दिन समस्त सीटों के मतदान होने के कारण वहां केंद्रीय बलों का दबाव हो सकता है।
