‘काली बारिश’ के भय में जी रहा Iran, चर्म रोग और कैंसर का बढ़ा खतरा

Black-Rain

नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : ईरान के तेल ढांचे पर हुए अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों के बाद वातावरण में फैला जहरीला धुआं ‘काली बारिश’ के रूप में जमीन पर लौटा। तेहरान और आसपास के इलाकों में पिछले सप्ताह हुई इस बारिश के बाद लोगों ने आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ और त्वचा पर असर की शिकायत की।

अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकते हैं। तेहरान के पास कई तेल ईंधन डिपो और एक रिफाइनरी पर हमले के बाद काले और तैलीय धुएं के घने बादल उठे थे। इसके बाद हुई बारिश में कालिख और रासायनिक तत्व घुलकर जमीन पर गिरे।

पश्चिम एशिया के अन्य हिस्सों में भी पिछले दो सप्ताह से ऐसा धुआं देखा जा रहा है, क्योंकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी क्षेत्र के पड़ोसी देशों की तेल और प्राकृतिक गैस सुविधाओं को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाया है। विशेषज्ञों के अनुसार बारिश से वातावरण में मौजूद खतरनाक रसायन कुछ समय में नीचे आ जाते हैं, लेकिन जिन लोगों के सीधे संपर्क में यह बारिश आई है, उन्हें सावधानी बरतनी होगी।

काली बारिश में कालिख, अम्लीय गैसें और पीएएच

काली बारिश तब होती है जब कालिख, राख और जहरीले रसायन वातावरण में पानी की बूंदों के साथ मिल जाते हैं और वर्षा के रूप में नीचे गिरते हैं। तेल कुओं, रिफाइनरियों, जंगल की आग, ज्वालामुखी विस्फोट और औद्योगिक प्रदूषण के बाद ऐसी स्थिति सामान्य रूप से देखी जाती है।

कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय की सिविल एवं पर्यावरण इंजीनियरिंग प्रोफेसर पीटर एडम्स के अनुसार ईंधन के अधूरे दहन से अत्यंत सूक्ष्म कालिख बनती है। तेल जलने पर पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (पीएएच), सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें भी निकलती हैं, जो अम्लीय वर्षा का कारण बनती हैं।

फेफड़ों और हृदय पर सीधा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सूक्ष्म कालिख इंसानी बाल की चौड़ाई से लगभग 40 गुना छोटी होती है और सांस के साथ फेफड़ों की गहराई तक पहुंचकर रक्त में मिल सकती है। इससे सांस की बीमारी, हृदय संबंधी समस्याएं और समयपूर्व मृत्यु का खतरा बढ़ सकता है। पीएएच के संपर्क से कैंसर का जोखिम भी बढ़ता है।

प्रदूषित बारिश में मौजूद भारी धातुएं पेयजल स्त्रोतों और जलमार्गों को भी दूषित कर सकती हैं

विश्व स्वास्थ्य संगठन और ईरानी स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों को घरों में रहने, मास्क पहनने और बारिश के सीधे संपर्क से बचने की सलाह दी है। अधिकारियों ने कहा है कि यह बारिश अत्यधिक अम्लीय है, जिससे त्वचा जल सकती है और फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।

कोलंबिया विश्वविद्यालय की केमिकल इंजीनियरिंग प्रोफेसर वी. फाये मैकनील ने कहा कि इस तरह की घटना में तीव्र स्वास्थ्य प्रभाव निश्चित रूप से सामने आते हैं। उनके अनुसार बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए खतरा अधिक है। कुछ ईरानी नागरिकों ने आशंका जताई है कि इस प्रदूषित बारिश में मौजूद भारी धातुएं पेयजल स्त्रोतों और जलमार्गों को भी दूषित कर सकती हैं।

कई दिन तक हवा में रह सकते हैं रसायन
विशेषज्ञों के अनुसार ईंधन टैंक सामान्यत: कुछ घंटों में जलकर खत्म हो जाते हैं, लेकिन यदि तेल कुओं में आग लग जाए तो स्थिति लंबे समय तक बनी रह सकती है। पीटर एडम्स ने कहा कि तेजी से जलने वाली आग में अधिकांश कालिख और रसायन हवा में फैलकर तीन से सात दिनों में वातावरण से साफ हो जाते हैं, लेकिन नए हमले होने पर संकट फिर बढ़ सकता है।

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