नई दिल्ली,डिजिटल डेस्क : इसरो ने अंतरिक्ष मिशनों की तैयारी को एक नया आयाम देते हुए लद्दाख में एक विशेष अभियान शुरू किया है, जहां गगनयात्रियों और ग्राउंड टीम की मानसिक, शारीरिक और कार्यक्षमता की कड़ी परीक्षा ली जा रही है।
यह मिशन न सिर्फ गगनयान कार्यक्रम के लिए अहम है, बल्कि भविष्य के लंबी अवधि वाले अंतरिक्ष अभियानों की सफलता की नींव भी रखेगा।
मिशन मित्रा (मैपिंग ऑफ इंटरऑपरेबल ट्रेट्स एंड रिलायबिलिटी असेसमेंट) नाम से चल रहा यह अध्ययन लेह में लगभग 3500 मीटर की ऊंचाई पर नौ अप्रैल तक संचालित होगा।
यहां कम ऑक्सीजन, अत्यधिक ठंड और अलगाव जैसी परिस्थितियां अंतरिक्ष के वातावरण का प्राकृतिक अनुकरण करती हैं, जिससे वैज्ञानिकों को वास्तविक परिस्थितियों के करीब डाटा मिल सके।
सुरक्षा की सबसे बड़ी कसौटी
इसरो के अनुसार, इस मिशन का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि कठिन और तनावपूर्ण परिस्थितियों में गगनयात्री और ग्राउंड कंट्रोल टीम किस तरह तालमेल बिठाते हैं और निर्णय लेने की क्षमता को कैसे बनाए रखते हैं।
अंतरिक्ष अभियानों में यह समन्वय और मानसिक दृढ़ता ही सफलता और सुरक्षा की सबसे बड़ी कसौटी होती है। इस अभियान को इसरो और भारतीय वायु सेना के एयरोस्पेस मेडिसिन संस्थान ने मिलकर डिजाइन किया है, जबकि बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप प्रोटोप्लैनेट इसके संचालन और तकनीकी प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहा है।
क्यों खास है यह मिशन ?
अंतरिक्ष में जाने वाले गगनयात्रियों के लिए केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन, टीम वर्क और दबाव में सही निर्णय लेने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी होती है।
मिशन मित्रा के जरिए इन्हीं मानवीय पहलुओं का गहराई से अध्ययन किया जा रहा है, ताकि भविष्य में भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन और भी सुरक्षित और सफल बन सकें।
